नवरात्रि में किस दिन कन्या पूजन करना होता हैं फलदायी, जानिए पूजन करने की विधि और नियम
- Written By: दीपिका पाल
कन्या पूजन किस दिन होता है शुभ (फाइल फोटो)
Chaitra Navratri 2024
नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: जैसा कि, हम जानते हैं चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2024) की शुरुआत 9 अप्रैल से होने वाली है वहीं पर इस दिन को लेकर माता (Goddess Durga) के भक्तों ने तैयारियां कर ली है जहां पर व्रत रखकर विधि और विधान से पूजन किया जाएगा। नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन करने का महत्व होता है वहीं पर इस दौरान सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन इन कन्याओं को नौ देवी मानकर पूजन करते है। क्या आपको कन्या पूजन के नियमों के बारे में जानकारी है अगर अच्छे से नहीं तो जानिए श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रसिद्ध (ज्योतिषाचार्य) गुरूदेव पंडित ह्रदय रंजन शर्मा के द्वारा विस्तार से इस खबर में।
नौ दिनों के व्रत के बाद करते हैं कन्या पूजन
नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है जहां पर नवरात्रि के नौ दिनों में पूजन के बाद भक्त अपना व्रत पूरा करते है। कहते है भक्त नौ दिनों के उपवास के बाद कन्याओं को अपने शक्ति के अनुसार भोजन कराकर दक्षिणा देते है इससे माता प्रसन्न होती है और भक्तों को आशीर्वाद देती है। कन्या पूजन के लिए शुभ समय सप्तमी से ही शुरू हो जाता है लेकिन जो लोग व्रत करते है वें नवमी या दशमी को कन्या पूजन के बाद ही प्रसाद ग्रहण कर सकते है। यहां पर सबसे शुभ दिन कन्या पूजन के लिए दुर्गाष्टमी का माना जाता है जो शुभ होता है। कहते है नौं कन्याओं के साथ एक बालक का होना भी अनिवार्य माना जाता है।जिसे हनुमानजी का रूप माना गया है. जिस प्रकार मां की पूजा भैरव के बिना पूरी नहीं पूर्ण नहीं होती, उसी प्रकार कन्या पूजन भी एक बालक के बगैर पूरा नहीं माना जाता है।
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जानिए कैसे करना चाहिए कन्या पूजन
यहां पर कन्या पूजन करने के लिए विधि और विधान जरूरी होते है जिसमें इस तरीके से कन्याओं का पूजन घर पर करना चाहिए, जो इस प्रकार है…
1- कन्या पूजन से एक दिन पहले कन्याओं को सम्मान के साथ आमंत्रण भेजें, क्योंकि उस दिन कन्या नहीं मिलने पर ढूंढना मुश्किल हो जाता है।
2- घर पर कन्याओं का स्वागत फूलों के साथ पूरा परिवार करें इस दौरान नव दुर्गा के नौ रूपों के नामों के जयकारें लगाएं।
3-कन्याओं को आरामदायक और साफ स्थान पर बैठाकर सभी के पैरों को स्वच्छ पानी या दूध से भरे थाल में पैर रखवाकर अपने हाथों से उनके पैर धोना चाहिए।
4- पैर छूकर आशीष लेना चाहिए और कन्याओं के पैर धुलाने वाले जल या दूध को अपने मस्तिष्क पर लगाना चाहिए।
5- कन्याओं को स्वच्छ और कोमल आसन पर बैठाकर पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए।
6- उसके बाद कन्याओं को माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम लगाना चाहिए।
7-इसके बाद मां भगवती का ध्यान करने के बाद इन देवी स्वरूप कन्याओं को इच्छा अनुसार भोजन कराएं.
8-कन्याओं को अपने हाथों से थाल सजाकर भोजन कराएं और अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और दोबारा से पैर छूकर आशीष लें।
किस उम्र की कन्याओं का पूजन होता है शुभ
चैत्र नवरात्रि के दिन 10 साल तक की उम्र की कन्याओं का पूजन करना शुभ माना जाता है अगर आपको 9 से ज्यादा कन्या भी मिल जाए तो उनका पूजन भी करना चाहिए।
1-दो वर्ष की कन्या का पूजन करने से घर में दुख और दरिद्रता दूर हो जाती है।
2-तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति का रूप मानी गई हैं. त्रिमूर्ति के पूजन से घर में धन-धान्य की भरमार रहती है, वहीं परिवार में सुख और समृद्धि जरूर रहती है।
3-चार साल की कन्या को कल्याणी माना गया है. इनकी पूजा से परिवार का कल्याण होता है।
4-पांच वर्ष की कन्या रोहिणी होती हैं. रोहिणी का पूजन करने से व्यक्ति रोगमुक्त रहता है।
5- छह साल की कन्या को कालिका रूप माना गया है. कालिका रूप से विजय, विद्या और राजयोग मिलता है।
6- सात साल की कन्या चंडिका होती है. चंडिका रूप को पूजने से घर में ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
7- 8 वर्ष की कन्याएं शाम्भवी कहलाती हैं. इनको पूजने से सारे विवाद में विजयी मिलती है।
8- 9 साल की की कन्याएं दुर्गा का रूप होती हैं. इनका पूजन करने से शत्रुओं का नाश हो जाता है और असाध्य कार्य भी पूरे हो जाते हैं।
9- दस साल की कन्या सुभद्रा कहलाती हैं. सुभद्रा अपने भक्तों के सारे मनोरथ पूरा करती हैं।
