'जन गण मन' का क्या है हिन्दी में अर्थ, मूलतः किस भाषा में लिखा गया था राष्ट्रगान, हर भारतीय को जानना चाहिए

भारत का राष्ट्रगान 'जन गण मन' मूलतः बांग्ला भाषा में लिखा गया था, जिसे भारत सरकार द्वारा 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान के रूप में अंगीकृत किया गया। भारत में रहने वाले हर नागरिक को इसका पूरा अर्थ पता होना चाहिए।
'जन गण मन' का क्या है हिन्दी में अर्थ, मूलतः किस भाषा में लिखा गया था राष्ट्रगान, हर भारतीय को जानना चाहिए
गणतंत्र दिवस,(सौ.सोशल मीडिया)
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Republic Day 2025: किसी देश का राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान उसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान होता है। साथ ही देशवासियों के लिए सबसे सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है। अगर बात राष्ट्रगान की करें तो, ‘राष्ट्रगान जन-गण-मन भारत की आजादी का एक अभिन्न हिस्सा है। हमारे देश का राष्ट्रगान ना केवल हमारी पहचान है बल्कि हमारी आन-बान-शान का प्रतीक भी है।

पंडित रविंद्रनाथ टैगोर की कलम से लिखे राष्ट्रगान जनगणमन को यूनेस्को की ओर से विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान करार दिया गया, जो बहुत गौरव की बात है।

आपको बता दें कि भारत का राष्ट्रगान 'जन गण मन' मूलतः बांग्ला भाषा में लिखा गया था, जिसे भारत सरकार द्वारा 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान के रूप में अंगीकृत किया गया। इसके गायन की अवधि लगभग 52 सेकेण्ड निर्धारित है और जब राष्‍ट्रगान गाया या बजाया जाता है तो श्रोताओं को सावधान की मुद्रा में खड़े होना आवश्यक है।

कल देश भर में राष्ट्रीय पर्व यानी गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। इस दिन सरकारी और निजी संस्थानों में भी झंडा फहराने और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है। जिसमें लोग झंडा फहराने के बाद राष्ट्रगान गाते हैं, देश में शायद ही कोई होगा, जिसे राष्ट्रगान नहीं आता होगा। लेकिन, कई लोग हैं, जो इसका हिंदी में अर्थ नहीं जानते। भारत में रहने वाले हर नागरिक को इसका पूरा मतलब पता होना चाहिए, इसलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

क्या है अर्थ जन गण मन का  

1. जन गण मन

जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता।

पंजाब, सिंधु, गुजरात, मराठा, द्रविड़, उत्कल, बंग।

अर्थ- जन गण मन (सभी लोगों के मन), अधिनायक (राजा या शासक), जय हे (आपकी जय हो), भारत भाग्य विधाता (आप भारत के भाग्य विधाता हो या भगवान हो)

पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा, द्रविड़ (दक्षिण भारत), उत्कल (ओडिशा), बंग (बंगाल)

इन दो पंक्तियों का पूरा अर्थ है-

सभी लोगों के मन के उस अधिनायक की जय हो, जो भारत के भाग्यविधाता हैं!

पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा, द्रविड़ (दक्षिण भारत), उत्कल (ओडिशा), बंग (बंगाल) के लोग आपकी जय करते हैं।

2- विंध्य, हिमाचल, यमुना, गंगा, उच्छल जलधि तरंग।

तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशीष मांगे।

गाहे तव जय गाथा

अर्थ- विंध्य और हिमालय पर्वत, यमुना और गंगा नदियां, और समुद्र की उठती लहरें

तव शुभ नामे जागे(सब तेरे पवित्र नाम पर जाग उठते हैं), तव शुभ आशीष मांगे (सब तेरी पवित्र आशीर्वाद पाने की इच्छा रखते हैं। गाहे तव जय गाथा (सब तेरे ही जयगाथाओं का गान करते हैं)

इन पंक्तियों का अर्थ है-

विंध्य और हिमालय पर्वत, यमुना और गंगा नदियां, और समुद्र की उठती लहरें,

सब तेरे पवित्र नाम पर जाग उठती हैं, सब तेरी पवित्र आशीर्वाद पाने की कामना करती हैं। सब तेरे ही जयगाथाओं का गान करते हैं।

3- जन गण मंगलदायक जय हे, भारत भाग्य विधाता।

जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे।

इन पंक्ति का अर्थ -

जनगण के मंगल दायक की जय हो, हे भारत के भाग्य विधाता (भारत के देवता)

आपकी विजय हो, विजय हो, विजय हो, हमेशा आपकी जय हो।

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