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नवरात्रि में जौ बोए बिना मां की आराधना है अधूरी, जानिए इसकी पौराणिक कथा

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Apr 10, 2024 | 11:06 AM

नवरात्रि पर क्यों बोते है ज्वारे (डिजाइन फोटो)

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सीमा कुमारी

नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क:
9 अप्रैल से जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा को समर्पित ‘चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2024) महापर्व की शुरुआत हो गई है। आपको बता दें, जिसमें माता के भक्त पूरी श्रद्धा के साथ मां भगवती की पूजा (Puja) अर्चना करते है। चाहे शारदीय नवरात्र हो, चैत्र नवरात्र हो या फिर गुप्त नवरात्र हो। ज्योतिषियों के अनुसार, सनातन धर्म में नवरात्रि पर ज्वारे या जौ का बहुत अधिक महत्व होता है। नवरात्र के पहले दिन ही घट स्थापना के साथ ही जौ बोए जाते है। ऐसा माना जाता है कि जौ के बिना मां दुर्गा की पूजा अधूरी होती है।

आखिर नवरात्रि में क्यों बोए जाते हैं जौ

कलश स्थापना के साथ मिट्टी के बर्तन में जौ बो दिए जाते है। यह परंपरा हिंदू धर्म में सदियो से चली आ रही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर नवरात्रि में जौ क्यों बोए जाते हैं और इसके पीछे क्या धार्मिक वजह है? ऐसे में आइए जानें इस बारे में। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान ब्रह्मा ने इस सृष्टि की स्थापना की तब वनस्पतियों में जो पहली फसल विकसित हुई थी वह ‘जौ’ थी। इसी कारण से नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ पूरे विधि-विधान से जौ बोई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जौ को भगवान ब्रह्मा का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए घट स्थापना के समय नवरात्रि में जौ की सबसे पहले पूजा की जाती है और उसे कलश में भी स्थापित किया जाता है।

मिट्टी के बर्तन में बोए जाते है जौ

आपको बता दें, कई लोग जौ को ज्वारे भी कहते है। नवरात्रि के समय मंदिर, घर और पूजा पंडालों में मिट्टी के बर्तनों में ज्वारे बोए जाते हैं, और प्रतिदिन मां दुर्गा की पूजा आराधना से पहले इनमें नियमित रूप से जल अर्पित किया जाता है। धीरे-धीरे यह अंकुरित होकर बढ़ने लगते हैं और कुछ दिनों में हरी-भरी फसल की तरह दिखाई देने लगते है। नवरात्रि के समापन पर इनको किसी नदी या तालाब में प्रवाहित कर दिया जाता है।

सृष्टि की है पहली फसल

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मान्यता के अनुसार मां दुर्गा की पूजा स्थल पर ज्वारे इसलिए बोए जाते हैं, क्योंकि धार्मिक ग्रंथों में इस सृष्टि की पहली फसल के रूप में जौ को ही बताया गया है। एक अन्य मान्यता के अनुसार जौ ही भगवान ब्रह्मा है। इसलिए हमेशा अन्न का सम्मान करना चाहिए, इन्हीं सब कारणों से जौ का इस्तेमाल पूजा में किया जाता है।

बोए गए जौ देते हैं संकेत

नवरात्रि के पहले जौ बोए जाते हैं और 9 दिनों तक उनकी देखभाल व पूजा-अर्चना की जाती है। जब जौ उगने लगते हैं तो यह आपके जीवन में आने वाले शुभ व अशुभ समय का संकेत देते है। यदि नवरात्रि के बाद 2 से 3 दिन में ही जौ उगने लगे तो इसे बहुत ही शुभ माना जाता है। इसका मतलब है कि आप पर माता रानी की कृपा बनी हुई है। वहीं यदि 2-3 दिन में जौ नहीं उगते तो यह अच्छा संकेत नहीं है। इसका मतलब है कि आपको किसी भी कार्य के लिए बहुत अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है।

There is a tradition of sowing barley during navratri

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Published On: Apr 10, 2024 | 11:06 AM

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