गर्मी में हल्के रंग के सूती कपड़े पहने व्यक्ति (सौ. एआई)
Summer Fashion Tips: जैसे-जैसे पारा 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों ने जीना मुहाल कर दिया है। ऐसे में सही कपड़ों का चुनाव न केवल आपको पसीने और चिपचिपाहट से बचाता है बल्कि आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी शांत रखता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार इस मौसम में सूती कपड़े किसी वरदान से कम नहीं हैं।
जब तपती गर्मी में शरीर का तापमान बढ़ने लगता है तब सूती कपड़े एक सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं। सूती कपड़ा पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इसमें किसी भी तरह के हानिकारक रसायन या सिंथेटिक फाइबर नहीं होते। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका ब्रीदेबल होना है यानी यह हवा को आसानी से आर-पार जाने देता है। इससे त्वचा ठंडी बनी रहती है और पसीना आने पर भी शरीर को घुटन महसूस नहीं होती।
पॉलिएस्टर या नायलॉन जैसे सिंथेटिक कपड़ों के विपरीत सूती कपड़ा पसीने को सोखने की अद्भुत क्षमता रखता है। यह पसीने को सोखकर उसे हवा के संपर्क में लाता है जिससे पसीना जल्दी सूख जाता है और शरीर को ठंडक मिलती है। यदि आप गर्मी में सिंथेटिक कपड़े पहनते हैं तो पसीना त्वचा पर ही जमा रहता है जिससे घमौरियां, खुजली, रेडनेस और पसीने की दुर्गंध जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
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कपड़ों के चुनाव में रंगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। विज्ञान के अनुसार गहरे रंग (जैसे काला, नेवी ब्लू या गहरा लाल) सूरज की गर्मी को सोखते हैं जिससे शरीर का तापमान और बढ़ जाता है। इसके विपरीत हल्के रंग जैसे सफेद, आसमानी, हल्का गुलाबी, क्रीम और पीला सूरज की किरणों को परावर्तित कर देते हैं। यही कारण है कि हल्के रंग के कपड़े पहनने पर गर्मी का अहसास काफी कम होता है।
आज के दौर में सूती कपड़े केवल सादगी तक सीमित नहीं हैं। बाजार में धारियां, चेक और कई आधुनिक डिजाइनों में कॉटन के कपड़े उपलब्ध हैं जिन्हें आप ऑफिस या कैजुअल आउटिंग के लिए स्टाइल कर सकते हैं। यह न केवल टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल हैं बल्कि त्वचा के प्रति भी बेहद मुलायम होते हैं। पुराने समय से दादी-नानी की दी गई यह सलाह आज के हीटवेव वाले दौर में भी सबसे सटीक और असरदार साबित होती है।