तमिलनाडु के मदुरै में पोंगल की तैयारियां शुरू, जानें कैसे मनाया जाता है यह त्यौहार
- Written By: अक्सा अंसारी
पोंगल का त्योहार
नई दिल्ली: नए साल की शुरुआत के साथ ही देश भर में त्योहारों (Festivals) का सिलसिला भी शुरू हो रहा है। भारत बहुधर्मी और बहुसंस्कृति का देश है इसलिए यहां सभी धर्मों के लोगों द्वारा कई तरह के अलग-अलग त्योहार मनाए जाते हैं। यहां मनाए जाने वाले हर एक त्योहार का अपना एक इतिहास है। इसी तरह अलग-अलग राज्यों और वहां की अपनी अलग संस्कृति के चलते एक ही त्योहार को कई तरीकों से भी मनाया जाता हैं। जिस तरह जनवरी के इस महीने में उत्तर भारत में जहां मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का पर्व मनाया जाता है तो वहीं भारत के दक्षिण हिस्से में इस दिन को पोंगल (Pongal) के रूप में मनाया जाता है।
पोंगल (Pongal) दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। ये मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में मनाया जाता है। दक्षिण भारत के लोग इस पर्व को नए साल के रूप में मनाते हैं। जिस समय उत्तर भारत में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है, ठीक उसी समय दक्षिण भारत में पोंगल का पर्व मनाया जाता है।
#WATCH | Tamil Nadu: Sugarcane farmers prepare jaggery ahead of Pongal celebration in Madurai pic.twitter.com/4TpVZ6nSVH — ANI (@ANI) January 3, 2024
पोंगल का त्योहार
पोंगल का त्योहार लगातार 4 दिनों तक मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन तमिल के लोग बुरी आदतों का त्याग करते हैं और इस परंपरा को पोही कहा जाता है। बता दें कि पोंगल का तमिल में अर्थ उफान या विप्लव होता है। पारम्परिक रूप से ये सम्पन्नता को समर्पित त्यौहार होता है, जिसमें समृद्धि लाने के लिए वर्षा, धूप तथा कृषि संबंधी की आराधना की जाती है। आइए जानते हैं इसे क्यों और कैसे मनाया जाता है।
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पोंगल त्योहार
दक्षिण भारत में होती है ‘पोंगल’ की धूम
तमिलनाडू में इस पर्व को पूरे चार दिनों तक मनाया जाता है। जिसका पहला दिन भोगी पोंगल, दूसरा दिन सूर्य पोंगल, तीसरा दिन मट्टू पोंगल और चौथा दिन कन्या पोंगल कहलाता है। दिनों के हिसाब से अलग-अलग तरीके से पूजा की जाती है। दक्षिण भारत के लोग फसल समेटने के बाद खुशी प्रकट करने और आने वाली फसल के अच्छे होने की प्रार्थना करते हैं। पोंगल पर्व में सुख समृद्धि के लिए लोग धूप, सूर्य, इन्द्रदेव और पशुओं की पूजा कर उनका आभार प्रकट करते हैं।
कन्या पोंगल
इस तरह 4 दिनों तक मनाया जाता है पोंगल
पहला दिन :
इस पर्व के पहले दिन इंद्र देव की आराधना की जाती है, क्योंकि इंद्र देव वर्षा के लिए उत्तरदायी होते हैं इसलिए खेती के लिए अच्छी बारिश की कामना से इनकी पूजा की जाती है। इस दिन लोग अपने घरों से पुराने खराब सामानों को निकालकर उन्हें जलाते हैं।
पोंगल पर इंद्र देव की आराधना
दूसरा दिन:
इस पर्व के दूसरे दिन सूर्य देव की आराधना की जाती है। इस दिन विशेष तरह की खीर बनाकर उसे भगवान सूर्य को अर्पित किया जाता है।
पोंगल पर सूर्य देव की अराधना
तीसरा दिन:
इस पर्व के तीसरे दिन कृषि पशुओं जैसे गाय, बैल की पूजा की जाती है। उन्हें नहला धुलाकर तैयार किया जाता है। बैलों के सींगों को रंगा जाता है।
पोंगल पर पशुओं की पूजा
चौथा दिन:
इस पर्व के चौथे और आखिरी दिन घर को फूलों से सजाया जाता है। इस मौके पर घर की महिलाएं आंगन में रंगोली बनाती हैं। ये इस पर्व का आखिरी दिन होता है इसलिए लोग एक दूसरे को मिठाई बाटकर इस त्योहार की शुभकामनाएं देते हैं।
पोंगल का आखिरी दिन
