मन की उलझनें कैसे कमजोर करती हैं शरीर? आयुर्वेद से जानिए हीलिंग करने का सही तरीका
Mental Stress Symptoms: लंबे समय तक तनाव और मानसिक उलझनें शरीर को बीमार बना सकती हैं। आयुर्वेद से जानिए मन और शरीर के संतुलन, दोषों के प्रभाव और तनाव कम करने के आसान उपाय के बारे में।
- Written By: दीपिका पाल
मन की उलझन (सौ. सोशल मीडिया)
Ayurvedic Stress Treatment: आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई जीवन की कई परेशानियों से परेशान है इसमें काम का दबाव, पैसों की चिंता, रिश्तों की खटास, भविष्य की अनिश्चितता सभी आती है। यहां पर इन समस्याओं की वजह से मन में उलझनों का जाल फैल जाता है। इन उलझनों की वजह से दिमाग में परेशानी और मेंटल हेल्थ को असर पड़ता है। तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर शरीर पर साफ दिखने लगता है।
इस तरह से मन की उलझनों से सिरदर्द, नींद न आना, पेट खराब रहना, थकान, चिड़चिड़ापन और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण नजर आते है। इनके लिए आयुर्वेद नुस्खों के बारे में बताया गया है।
मन और शरीर का है तालमेल
आयुर्वेद के अनुसार, मन और शरीर के बीच तालमेल एक सा होता है मन जैसा सोचता है वैसा शरीर पर असर पड़ता है। अगर आप मन में कई तरह की उलझनों के साथ चलते है तो दिमाग और शरीर पर खराब असर पड़ता है। मन और शरीर दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। मन में असंतुलन होता है तो शरीर के दोष (वात, पित्त और कफ) भी बिगड़ने लगते हैं। लगातार चिंता और डर से वात दोष बढ़ता है, जिससे घबराहट, अनिद्रा और जोड़ों में दर्द होने लगता है।
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हाई ब्लड का होता है खतरा
यहां मन की उलझनों की वजह से गुस्सा और तनाव का स्तर बढ़ जाता है।जिससे एसिडिटी, हाई ब्लड प्रेशर और त्वचा की समस्याएं पैदा होती हैं। वहीं उदासी और सुस्ती कफ को बढ़ाकर मोटापा, सुस्ती और कमजोर पाचन का कारण बनती हैं। इसलिए आयुर्वेद में इलाज की शुरुआत शरीर से नहीं, बल्कि मन को शांत करने से की जाती है।
दैनिक दिनचर्या में करें सुधार
यहां पर मन को संतुलित करने के लिए आपको अपने आयुर्वेद में दिनचर्या या डेली रूटीन में बदलाव करना जरूरी है।सुबह जल्दी उठना, सूरज की रोशनी में कुछ देर टहलना और दिन की शुरुआत गहरी सांसों के साथ करना मन को हल्का करता है। रोज 10-15 मिनट तिल या नारियल तेल से सिर और पैरों की मालिश करने से नर्वस सिस्टम शांत होता है और तनाव कम महसूस होता है। भोजन भी मन की स्थिति पर असर डालता है, इसलिए बहुत ज्यादा तीखा, तला-भुना और कैफीन से भरा खाना कम करना चाहिए। इसकी जगह हल्का, सादा और गर्म भोजन जैसे दाल, सब्जी, घी और दूध मन को स्थिर रखता है।
आयुर्वेद में जड़ी-बूटियां होती है कारगर
यहां पर आयुर्वेद में कई तरह की जड़ी-बूटियां तनाव को लड़ने में मदद दिलाता है। इसके लिए अश्वगंधा शरीर को मानसिक दबाव के अनुकूल बनाती है और थकान दूर करती है। ब्राह्मी और शंखपुष्पी याददाश्त सुधारने के साथ मन को शांत करती हैं। तुलसी और गिलोय की चाय रोज पीने से मन के साथ-साथ इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है। इसके अलावा योग और प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और शवासन मन को गहरी शांति देते हैं और बेचैनी को धीरे-धीरे कम करते हैं।
आईएएनएस के अनुसार
