
क्या होता है मंकी फीवर का असर (डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल टीम: कर्नाटक (Karnataka) राज्य के कन्नड़ (Kannad) जिले में इन दिनों मंकी फीवर (Monkey Fever) का असर छाया हुआ है जिसके चलते 30 से ज्यादा मामले सामने आ चुके है। इस फीवर से पीड़ित लोगों में फिलहाल सामान्य स्थिति बनी हुई है लेकिन इस बीमारी के बारे में जानना जरूरी है। इसके लक्षणों को पहचानकर सही समय पर इलाज किया जाए तो गंभीर खतरों से बचे रह सकते है।
यहां पर कर्नाटक में फैली इस बीमारी मंकी फीवर के बारे में बात करें तो, यह फ्लेविविरिडे परिवार से संबंधित एक वायरस है जिसे मूल भाषा में क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (Kyasanur Forest disease) भी कहते हैं। यह बीमारी का खतरा बंदरों द्वारा फैलता है जब इंसान उसके संपर्क में आता है। एक तरह से बंदरों को होने वाली बीमारी का असर इंसानों को होता है। बता इस बीमारी की फिलहाल नहीं साल 1957 में पहचान की गई थी। जब उस दौरान कई बंदरों की मौत हुई थी इस लिए इस बीमारी को मंकी फीवर कहा जाता है।
यहां पर इस बीमारी के लक्षण सामान्य से गंभीर भी होते है, जो इस प्रकार है…
– तेज बुखार आना
– ठंड लगना
– मांसपेशियों में दर्द महसूस होना
– सिर दर्द की समस्या
– उल्टी आना
-रक्तस्राव की समस्या
– प्लेटलेट्स का गिरना
– आंखों में दर्द और सूजन
इस मंकी फीवर बीमारी से बचाव का साधन वैक्सीन है जो एक महीने में दो डोज लगाई जाती है। इस बीमारी से बचने के लिए व्यक्ति को जानवरों के संपर्क में कम रहने और परहेज अपनाकर साफ-सफाई से ख्याल रखना जरूरी है। इसके अलावा माना जाता है कि, जो लोग जंगल में या आसपास रहते है उन्हें इस बीमारी के होने का खतरा ज्यादा रहता है।






