बीड में 12वीं बोर्ड परीक्षा में नकल, ड्रोन कैमरे ने खोली पोल! 5 शिक्षक सस्पेंड

Beed News: महाराष्ट्र के बीड में 12वीं की परीक्षा के दौरान ड्रोन कैमरों ने शिक्षकों को ही छात्रों की नकल कराते पकड़ा। 17 पर FIR दर्ज हुई है और 5 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है।
Five out of 17 teachers suspended for cheating in Maharashtra Class 12 board exams
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Beed HSC Board Exam Cheating Case: महाराष्ट्र के बीड जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां 12वीं कक्षा (HSC) की बोर्ड परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर नकल कराने के आरोप में पांच शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी धोखाधड़ी का खुलासा किसी मुखबिर ने नहीं, बल्कि प्रशासन द्वारा तैनात किए गए ड्रोन कैमरों ने किया है।

ड्रोन कैमरे ने खोला नकल का राज

यह घटना 10 फरवरी की है, जब महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षण मंडल की परीक्षाएं शुरू हुई थीं। चौसाला स्थित परीक्षा केंद्र संख्या 224 पर प्रशासन ने निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया था। जब ड्रोन के फुटेज देखे गए, तो अधिकारी दंग रह गए। फुटेज में साफ दिख रहा था कि 16 अलग-अलग परीक्षा कक्षों में पर्यवेक्षक (इन्विजिलेटर) न केवल नकल रोकने में नाकाम रहे, बल्कि वे खुद छात्रों को खुलेआम नकल करने में मदद कर रहे थे।

17 शिक्षकों पर FIR, 5 काे किया निलंबित

बीड जिले के कलेक्टर विवेक जॉनसन के कड़े निर्देशों के बाद, नेकनूर पुलिस स्टेशन में परीक्षा केंद्र के मुख्य संचालक सहित कुल 17 शिक्षकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, बोर्ड एवं अन्य निर्दिष्ट परीक्षाएं (कदाचार निवारण) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लिंबागणेश स्थित भालचंद्र विद्यालय के 5 शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अधिकारी ने बताया कि अन्य तीन संस्थानों के 12 शिक्षकों के खिलाफ भी जांच जारी है और आने वाले दिनों में उन पर भी निलंबन की गाज गिर सकती है।

जिलाधिकारी ने दी सख्त चेतावनी

बीड के जिलाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि बोर्ड परीक्षाओं की पवित्रता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल अब अन्य संवेदनशील केंद्रों पर भी बढ़ाया जा सकता है ताकि 'कॉपी-मुक्त' परीक्षा सुनिश्चित की जा सके

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