International Dog Day: खाकी वर्दी से लेकर रेस्क्यू ऑपरेशन तक, भारतीय K9 स्क्वॉड के इन जांबाजों की कहानी

Indian K9 Squad देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते है। आतंकवाद विरोधी अभियान से लेकर विस्फोटक की पहचान और रेस्क्यू ऑपरेशन तक, जानें भारतीय सेना के जांबाजों की बहादुरी की कहानियां।
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K9 डॉग स्क्वॉडफोटो.सोशल मीडिया
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K9 Dog Squad: भारत की सुरक्षा व्यवस्था में K9 स्क्वॉड यानी स्पेशल ट्रेनिंग वाले कुत्तों की भूमिका बेहद अहम है। ये सिर्फ पुलिस या सेना के साथ चलने वाले कुत्ते नहीं, बल्कि विस्फोटक और नशीले पदार्थों की पहचान, ट्रैकिंग, तलाशी, गश्त और आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी अहम भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षित साथी होते है।

बेल्जियन शेफर्ड मालिनोइस, जर्मन शेफर्ड और लैब्राडोर जैसी नस्लों का इस्तेमाल अलग-अलग भूमिकाओं में किया जाता है।

टायसन: गोली लगने के बाद भी मिशन से पीछे नहीं हटा

2026 में भारतीय सेना के असॉल्ट डॉग टायसन को उसकी बहादुरी के लिए राष्ट्रपति सम्मान से नवाजा गया। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में एक आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान टायसन ने आतंकियों का पता लगाने में अहम भूमिका निभाई। ऑपरेशन के दौरान उसके पैर में गोली लगी, लेकिन वह मिशन में योगदान देता रहा।

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K9 स्क्वॉडफोटो.सोशल मीडिया

जोरबा: शिकारियों के खिलाफ बना जंगल का प्रहरी

भारत के शुरुआती K9 अभियानों में जोरबा का नाम खास तौर पर लिया जाता है। बेल्जियन मालिनोइस जोरबा ने असम में वन्यजीव अपराध और शिकारियों के खिलाफ अभियान में अधिकारियों की मदद की। रिपोर्ट के मुताबिक, उसने करीब आठ साल तक अपनी सेवा दी और 60 शिकारियों को पकड़ने में मदद की।

वास्ट और डेनबी: पेरिस ओलंपिक में भारत की K9 टीम

भारतीय K9 स्क्वॉड की क्षमता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि  पेरिस ओलंपिक 2024 में भी सुरक्षा के लिए के9 स्क्वॉड की मदद ली गई थी। CRPF के K9 वास्ट और डेनबी को ओलंपिक स्थलों की सुरक्षा के लिए चुना गया था। दोनों बेल्जियन मालिनोइस को कई सारे टेस्ट के बाद चुना गया और तैनाती से पहले करीब 10 सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया।

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K9 स्क्वॉडफोटो.सोशल मीडिया

K9 की नाक बनती है सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत

इन कुत्तों को विस्फोटक, IED, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों जैसी चीजों की पहचान के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। सुरक्षा अभियानों में उनकी सूंघने की क्षमता और तेजी से संदिग्ध क्षेत्र को जांचने की क्षमता बेहद उपयोगी होती है।

सिर्फ सेना नहीं, पुलिस भी लेती है K9 की मदद

K9 यूनिट का काम सिर्फ सीमा या आतंकवाद विरोधी अभियान तक सीमित नहीं है। पुलिस डॉग अपराध की जांच, संदिग्धों की तलाश, ट्रैकिंग और लापता लोगों को खोजने में भी मदद कर सकते हैं। मुंबई पुलिस के K9 सदस्य जेसी ने हत्या, लूट और अपहरण जैसे मामलों की जांच में अहम भूमिका निभाई।

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K9 स्क्वॉडफोटो.सोशल मीडिया
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इनकी ट्रेनिंग भी किसी सैनिक से कम नहीं

एक K9 को सेवा में शामिल करने से पहले उसकी आज्ञाकारिता, शारीरिक क्षमता और विशेष कौशल की जांच की जाती है। हैंडलर और K9 के बीच तालमेल भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। पेरिस ओलंपिक के लिए चुनी गई भारतीय टीमों को सामान्य प्रशिक्षण के अलावा विशेष मिशन के अनुरूप लगभग 10 सप्ताह की ट्रेनिंग दी गई थी।

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