

Turmeric Adulteration: हल्दी सिर्फ किचन की सब्जियों में ही नहीं, बल्कि इसके कई धार्मिक महत्व भी होते हैं। हल्दी को शुभता का प्रतीक भी माना जाता है। जबकि आयुर्वेद के अनुसार हल्दी में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं।
बता दें कि सनातन धर्म के सभी शुभ कार्यों में हल्दी का खूब इस्तेमाल किया जाता है। शादी में भी हल्दी के रस्म को लोग धूमधाम से मनाते हैं। शादी में हल्दी की रस्मों के बिना शादी अधूरी रहती है, लेकिन बाजार में असली और नकली दोनों हल्दी मिल रही है, ऐसे में कैसे पहचानें कि कौन सी हल्दी शुद्ध है।
यह सबसे आसान तरीका है। एक गिलास साफ पानी में हल्दी डालकर देखें। असली हल्दी धीरे-धीरे नीचे बैठ जाती है और पानी में ज्यादा रंग नहीं छोड़ती। जबकि नकली या मिलावटी हल्दी तुरंत पानी को गहरा पीला या नारंगी कर देती है। यह इस बात का संकेत होता है कि उसमें आर्टिफिशियल कलर मिलाया गया है।
असली हल्दी का रंग हल्का, प्राकृतिक और थोड़ा मटमैला पीला होता है। लेकिन नकली हल्दी बहुत ज्यादा चमकीली पीली या गहरे रंग की होती है, जो देखने में आकर्षक लग सकती है लेकिन अक्सर उसमें केमिकल डाई का इस्तेमाल होता है।
अगर हल्दी में स्टार्च या अन्य कोई भी मिलावट है, तो उस पर आयोडीन डालने से नीला या काला रंग बदल सकता है। यह तरीका खासतौर पर प्रयोगशाला या घर पर जांच के लिए उपयोगी माना जाता है।
हल्दी को चम्मच में लेकर हल्की आंच पर गर्म करें. अगर हल्दी शुद्ध होगी तो उसमें से हल्की प्राकृतिक खुशबू आएगी। अगर उसमें मिलावट है, तो जलने पर अजीब सी गंध या केमिकल जैसी महक आ सकती है।
लेड क्रोमेट लेड और क्रोमियम‑6 जैसे दो अत्यंत जहरीले भारी धातुओं से बना रासायनिक यौगिक है, जिसका उपयोग पेंट, डाई और प्लास्टिक उद्योग में किया जाता है। यह इतना अधिक जहरीला होता है कि एक साथ मस्तिष्क, तंत्रिका तंत्र, लिवर, किडनी और प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल असर डालता है। क्रोमियम‑6 को कैंसरजन्य तत्व माना जाता है।
लेड क्रोमेट के सेवन से सिरदर्द, चक्कर, याददाश्त कमजोर होना, पेट व फेफड़ों का कैंसर, लिवर‑किडनी को नुकसान, गर्भस्थ शिशु में विकृति और बच्चों के शारीरिक‑मानसिक विकास में बाधा जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।