

Mustard Oil Health Tips: भारतीय खाना तेल के बिना अधूरा माना जाता है। न केवल खाने में बल्कि चेहरे, बालों व शरीर पर लगाने में भी सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। खाने में सरसों तेल का उपयोग फायदेमंद है, क्यों कि इसमें ट्रांस फैट नहीं होता है।
ट्रांस फैट के अधिक सेवन से शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक होता है। अमेरिका, कनाडा और यूरोप जैसे देशों में शुद्ध सरसों के तेल के इस्तेमाल पर पूरी तरह से बैन है। इसे सिर्फ मसाज ऑयल, सीरम या फिर हेयर ट्रेटमेंट के लिए ही उपयोग किया जा सकता है।
एक्सपर्ट भी सरसों के तेल के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। सरसों के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड फैट्टी एसिड (एमयूएफए) भरपूर मात्रा में होता है। सरसों के तेल में बड़ी मात्रा में ओमेगा-3 फैट्टी एसिड और अल्फा-लिनोलेनिक एसिड भी होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव तनाव और बॉडी में इन्फ्लेमेशन को कम करते हैं। सरसों के तेल में एक फाइटोकेमिकल कंपाउंड होता है, जिसे एलिल आइसोथियोसाइनेट (एआईटीसी) कहा जाता है, यह एंटी-इंफ्लेमेट्री होता है।
डॉकटर्स की मानें, तो सरसों के तेल की कंपोजिशन कार्डियोलॉजी के लिए बहुत अच्छी है। यही वजह है कि सारे डॉक्टर्स दिल की बीमारियों, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचने के लिए सरसों के तेल में खाना बनाने की सलाह देते हैं। इसमें अल्फा-लिनोलेनिक एसिड पाया जाता है, जो खून में प्लेटलेट्स के इकट्ठा होने की प्रवृत्ति को कम करता है, इससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम हो जाता है।
सरसों के तेल की कंसिस्टेंसी गाढ़ी होती है, इसलिए यह एक नेचुरल मॉइश्चराइजर की तरह काम करता है। यदि आपकी स्किन काफी रूखी रहती है, तो नहाने के बाद इसे हाथों व पैरों पर लगाने से रूखापन चला जाता है। इसमें एंटीफंगल और एंटीबैक्टिरियल गुण पाए जाते हैं, जिससे इंफेक्शन नहीं होता है। इसमें विटामिन-ई की अच्छी मात्रा होने के कारण यह स्किन को नमी देता है। पैरों के तले में इससे मसाज करने से रिलैक्स्ड महसूस होता है।
जिनकी स्किन सेंसेटिव होती है, उन्हें सरसों के तेल के इस्तेमाल से बचना चाहिए। उनको इस तेल से जलन व एलर्जी हो सकती है। सरसों के तेल को लगाकर धूप में निकलने से स्किन पर टैनिंग हो सकती है। कई बार इससे स्किन पर रैशेज हो जाते हैं। इसलिए सरसों के तेल को रात में लगाना अधिक सुरक्षित है। इसके साथ ही बच्चों पर इस तेल का इस्तेमाल कम करना चाहिए। इसके थीकनेस की वजह से पोर्स बंद हो सकते हैं। इसलिए गर्मियों में इसे नहाने से पहले लगाएं।
दांत में दर्द होने पर सरसों के तेल से मसूड़ों पर हल्की मालिश करें। इससे दर्द दूर हो जाएगा, साथ ही दांत मज़बूत भी होंगे। सरसों का तेल और नमक दांतों से दाग-धब्बे और पीलापन दूर करने में असरदार होते हैं। सरसों का तेल बैक्टीरिया को साफ करने में मदद करता है, साथ ही मसूड़ों से आने वाले खून को भी बंद करता है। दांतों से प्लाक हटाने के लिए आप सरसों के तेल में नमक मिलाकर मंजन कर सकते हैं।