

Benefit Of Mace and Nutmeg: जायफल या नटमेग एक मसाला है जो 'माइरिस्टिका फ्रैग्रेंस' नाम के पेड़ से मिलता है। इसके बीजों को पीसकर मसाला बनाया जाता है, जिसे हम जायफल कहते हैं और इन बीजों के ऊपर के लाल रंग के छाल को जावित्री कहते हैं।
जायफल और जावित्री एक ही पेड़ से मिलते हैं और इनका स्वाद भी एक जैसा होता है। जायफल साबुत बीज के रूप में मिलता है, जिसे ग्रेट करके कई तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है। जबकि जावित्री को हमेशा सुखाकर लाल पाउडर के रूप में पीसा जाता है। इनमें एक जैसे कंपाउंड होते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं। जावित्री ज़्यादा मीठी और हल्की होती है।
आयुर्वेद के अनुसार, जावित्री की तासीर गर्म होती है। इसलिए, यह कफ या वात दोष की समस्या वाले लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है। यह जी मिचलाने, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, गैस और पेट फूलने में भी लाभप्रद है।
एक्सपर्ट बताते हैं, किसी भी दूसरी आयुर्वेदिक दवा की तरह, जावित्री का ज़रूरत से ज्यादा इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है, जैसे शरीर की गर्मी बढ़ना, पेट में जलन, गर्भवती महिलाओं को चक्कर आना और लिवर पर बुरा असर पड़ सकता है। कृपया इस जड़ी-बूटी का इस्तेमाल करने से पहले किसी मेडिकल एक्सपर्ट से सलाह लें और हमेशा सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करें।
यह मेटाबॉलिज़्म को ठीक रखती है। जावित्री पाचन तंत्र को बेहतर बनाती है, शरीर में जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है। साथ ही इससे गैस, ब्लोटिंग या पेट की अन्य समस्याओं में भी फायदा मिलता है।
जायफल पाचन को बेहतर बनाने और पेट फूलने व गैस जैसी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है।
जायफल में ऐसे तत्व होते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं, इससे गठिया जैसी बीमारियों में राहत मिल सकती है।
जायफल में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल से होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं।
जायफल का असर शांत करने वाला होता है, जिससे नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिन्हें अनिद्रा यानी इनसोमनिया की समस्या है।
दर्द कम करने वाले गुणों के कारण इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली दवाइयों में भी किया जाता है। इससे दर्द से राहत में मदद मिलती है।
जायफल मूड को अच्छा बना सकता है और एंग्जायटी, चिंता व डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।
इसके एंटीबैक्टीरियल गुण सांस की बदबू को दूर करने और मुंह के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता हैं।
आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में जायफल की तासीर आमतौर पर गर्म मानी जाती है। उत्तेजक गुणों के कारण इसे अक्सर गर्म मसाले की श्रेणी में रखा जाता है। डॉक्टर का कहना है, इसका मतलब यह है कि यह पाचन और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, खासकर सर्दियों के मौसम में। हालांकि, इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए, क्योंकि बहुत ज़्यादा सेवन से नुकसानदायक हो सकते हैं।
जायफल का मसाले के तौर पर इस्तेमाल सुरक्षित है, लेकिन इसके अधिक सेवन से जी मिचलाना, चक्कर आना, मतिभ्रम यानी hallucinations और मिरिस्टिसिन (myristicin) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह कुछ दवाओं के साथ भी रिएक्ट करता है।
आयुर्वेद के अनुसार, गर्मी के मौसम में रोज़ाना 100-250 मिलीग्राम जायफल का सेवन करना चाहिए। अगर आप तनाव में हैं, तो हल्के गर्म दूध में एक चुटकी जायफल मिलाकर सोने से पहले पिएं। इससे आपका तनाव कम होगा और मानसिक शांति मिलेगी।
आयुर्वेद के अनुसार, जिन्हें नींद न आने की समस्या या कमजोरी है, वे इसे दूध के साथ ले सकते हैं। पाचन संबंधी समस्या के लिए जावित्री का सेवन शहद के साथ करना चाहिए। आप इसे मसाले के तौर पर खाने में मिला सकते हैं या तो आयुर्वेदिक काढ़े में डालकर या पाउडर के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।