घर का माहौल हो या स्क्रीन टाइम, बच्चों की मेंटल हेल्थ को कैसे कर रहे प्रभावित, जानिए

Children Mental Health: मोबाइल की दुनिया में रहने वाले बच्चे अपनी पढ़ाई पर भी सही तरीके से वक्त नहीं दे पा रहे है। इसकी वजह से वह मानसिक परेशानी या मेंटल स्ट्रेस की समस्या से परेशान रहते है।
Kids Health, Health News
मानसिक स्वास्थ्य (सौ. सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Screen Time Effects On Children: समय बदलता जा रहा है जहां पहले बच्चे मोबाइल की दुनिया से दूर खेल के मैदान पर नजर आते थे और शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत भी रहे। बदलाव के साथ आज के युग में बच्चे बाहरी खेलकूद की दुनिया से दूर मोबाइल में ही अपनी जिंदगी खोज रहे है। पढ़ाई का दबाव, बदलती जीवनशैली, मोबाइल और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच, ये सब चीजें बच्चों के मन पर गहरा असर डाल रही है। मोबाइल की दुनिया में रहने वाले बच्चे अपनी पढ़ाई पर भी सही तरीके से वक्त नहीं दे पा रहे है। इसकी वजह से वह मानसिक परेशानी या मेंटल स्ट्रेस की समस्या से परेशान रहते है। बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य एक बेहद गंभीर विषय बन गया है, जिस पर ध्यान देना अब केवल जरूरी नहीं बल्कि अनिवार्य हो गया है।

मानसिक रूप से स्वस्थ बच्चा ही खुश रहता है, बेहतर सीख सकता है और अपने भविष्य को सही दिशा दे सकता है। इसी कड़ी में यह समझना जरूरी है कि आखिर कौन-सी चीजें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं और वे कैसे धीरे-धीरे उनके मन और सोच पर असर डालती हैं।

इन कारणों से बच्चों के मानसिक सेहत पर पड़ता है असर

यहां पर बात करें तो, मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ने की कई वजहें है इसके बारे में ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

1- अगर बच्चे माता-पिता के बुरे बर्ताव को देखते है तो वे मानसिक रूप से परेशान हो जाते है। घर का माहौल बच्चें की मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है। बच्चा सबसे पहले घर से ही दुनिया को समझना सीखता है। अगर घर का माहौल तनावपूर्ण हो, माता-पिता अक्सर गुस्से में बात करें या बच्चों की बात सुने बिना उन्हें डांट दें, तो बच्चे के मन में डर पैदा होने लगता है।

2- माता -पिता के व्यवहार की वजह से बच्चा अपनी बातें आसानी से कहने से डरता है। ऐसा बच्चा अपनी भावनाओं को दबाने लगता है और खुद को अकेला महसूस करता है। धीरे-धीरे यह डर चिंता और आत्मविश्वास की कमी में बदल सकता है। वहीं, जब माता-पिता प्यार से बात करते हैं, गलती पर समझाते हैं, और बच्चे की बात ध्यान से सुनते हैं, तो बच्चे का मन सुरक्षित महसूस करता है। यह सुरक्षा भावना उसके दिमाग को शांत रखती है और वह खुलकर सोचने व सीखने लगता है।

3- अगर बच्चे के स्कूल का वातावरण खराब है या बच्चे को किसी बच्चे या शिक्षक से प्रताड़ना मिल रही है तो यह उसकी पढ़ाई से लेकर निजी जिंदगी पर असर करता है। स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों की दूसरी दुनिया होता है। अगर स्कूल में हर समय नंबरों की दौड़ हो, तुलना की जाए, या शिक्षक बहुत सख्त रवैया अपनाएं, तो बच्चे के मन में असफल होने का डर बैठ जाता है। यह डर दिमाग में तनाव पैदा करता है, जिससे बच्चा पढ़ाई में मन नहीं लगा पाता।

4- कई बातें या बार-बार मिल रही डांट भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर करता है। मनोविज्ञान के अनुसार, बच्चों का दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए वे ऑनलाइन चीजों को सच मान लेते हैं। इससे भ्रम, डर और उदासी जैसी भावनाएं जन्म ले सकती हैं। इसके लिए बच्चों को समझाने और संभालने की आवश्यकता होती है।

5- आज के दौर में सोशल मीडिया भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला बड़ा कारण बन गया है। सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली चमक-दमक बच्चों को खुद से तुलना करने पर मजबूर करती है। जब बच्चा दूसरों को ज्यादा अच्छा और ज्यादा सफल देखता है, तो उसके मन में हीन भावना पैदा हो सकती है।

इन सभी कारणों से बच्चे मानसिक स्वास्थ्य से प्रभावित नजर आते है इसके लिए आपको थोड़ा सा खुद पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com