

HbA1c Test Explained: HbA1c टेस्ट ग्लाइकेटेड या ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का टेस्ट होता है। इस टेस्ट में पिछले 3 महीनों के औसत ब्लड शुगर लेवल को चेक किया जाता है। जिस भी व्यक्ति को डायबिटीज है, यह टेस्ट उन सभी के लिए रूरी है। इस टेस्ट को ग्लाइको हीमोग्लोबिन टेस्ट, ए1सी टेस्ट या ए1सी भी कहा जाता हैं।
हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स में मौजूद प्रोटीन है, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है। ब्लड में मौजूद शुगर या ग्लूकोज एक प्रकार के हीमोग्लोबिन के साथ मिल जाते हैं और इससे बने संयोजन अणु को ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन कहा जाता है।
एक रेड ब्लड सेल 120 दिन या 4 महीने तक जीवित रहता है। इसे जांचने के लिए ही डायबिटीज के मरीजों का 2-3 महीनों का ब्लड शुगर लेवल चेक किया जाता है।
डायबिटीज के ज्यादातर मरीज डायबिटीज़ को नियंत्रण में रखने के लिए नियमित रूप से फास्टिंग और खाना खाने के बाद ब्लड शुगर चेक करते हैं, लेकिन केवल इतना ही काफी नहीं होता है।
हालांकि यह आदत फास्टिंग और खाना खाने के बाद ब्लड ग्लूकोज की ट्रैकिंग में मदद करता है, जो कि जरूरी है, लेकिन यह केवल एक निश्चित समय का ही ब्लड शुगर लेवल बताता है। जैसे- बीती रात आपने क्या खाया था इसके आधार पर आपकी टेस्ट रिपोर्ट अलग हो सकती है। HbA1c टेस्ट 3 महीने का डेटा होता है, जो कि डायबिटीज लेवल के बारे में बताता है। यदि HbA1c कम होता है, तो इसका मतलब है डायबिटीज से होने वाले जोखिम भी कम होंगे।
HbA1c का नंबर से यह भी पता चलता है कि डायबिटीज कितना कंट्रोल में है। दूसरी ओर डायबिटीज वाले या नॉन-डायबिटीज वाले सभी लोगों में हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के लिए बढ़े हुए HbA1c को रिस्क फैक्टर के तौर पर देखा जाता है।
HbA1c टेस्ट डायग्नोज करने और मॉनिटर करने के उद्देश्य से किया जाता है। प्री-डायबिटीज, बॉर्डरलाइन डायबिटीज वाले लोगों को भी यह टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है ताकि पता चल सके कि उनका ब्लड शुगर लेवल कितना स्टेबल है।
सामान्य तौर पर, डायबिटीज और प्री-डायबिटीज वाले लोगों को हर 3 महीने में यह टेस्ट करवा लेना चाहिए। अगर आप स्वस्थ हैं लेकिन आपके परिवार में डायबिटीज की हिस्ट्री है या आपको लगता है कि आपके लाइफस्टाइल के कारण आपको डायबिटीज हो सकता है, तो आपको हर 6 महीने में यह टेस्ट करवाना चाहिए।
फास्टिंग या खाना खाने के बाद का ब्लड शुगर टेस्ट की तरह ही HbA1c टेस्ट के लिए किसी भी तरह की फास्टिंग की ज़रुरत नहीं होती है। आप दिन में किसी भी समय टेस्ट के लिए सैंपल दे सकते हैं।