न्यूरोलॉजिस्ट की बड़ी चेतावनी! सिर्फ बुढ़ापा नहीं ये खराब आदतें हैं ब्रेन डैमेज की असली वजह

Memory Loss Causes: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में दिमाग से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अक्सर लोग इसे उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन कुछ आदतें ब्रेम डैमज का कारण बन सकती हैं।
Bad Habits That May Cause Brain Damage
प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. फ्रीपिक)
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Brain Aging Habits: अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि याददाश्त का कम होना या मानसिक स्फूर्ति में गिरावट केवल बढ़ती उम्र का एक हिस्सा है। लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और विशेषज्ञों का मानना कुछ और ही है। जानकारी के अनुसार हमारी कुछ रोजमर्रा की आदतें और जीवनशैली से जुड़ी गलतियां हमारे मस्तिष्क की कोशिकाओं को समय से पहले नष्ट कर रही हैं जिसे मेडिकल भाषा में ब्रेन एट्रोफी या दिमाग का सिकुड़ना कहा जाता है।

नींद और तनाव

विशेषज्ञों के अनुसार जब हम गहरी नींद में होते हैं तो हमारा मस्तिष्क एक ग्लीम्फैटिक सिस्टम के जरिए अपने अंदर जमा विषाक्त कचरे की सफाई करता है। नींद की लगातार कमी इस प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया को बाधित करती है जिससे याददाश्त कमजोर होने लगती है। वहीं लंबे समय तक बना रहने वाला मानसिक तनाव शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ा देता है जो सीधे तौर पर मस्तिष्क के उस हिस्से (हिप्पोकैम्पस) को नुकसान पहुंचाता है जो नई यादें बनाने के लिए जिम्मेदार है।

मोटापा और डायबिटीज का कनेक्शन

शोध यह स्पष्ट करते हैं कि मोटापे के कारण मस्तिष्क का वॉल्यूम कम हो सकता है। विशेष रूप से पेट की चर्बी मस्तिष्क के अगले हिस्से की उम्र तेजी से बढ़ाती है। इसी प्रकार यदि डायबिटीज को नियंत्रित न रखा जाए तो यह मस्तिष्क की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को डैमेज करती है जिससे स्ट्रोक और डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

शारीरिक और सामाजिक सक्रियता की कमी

दिनभर एक जगह बैठे रहना और फिजिकल एक्टिविटी न करना मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को धीमा कर देता है। इसके विपरीत पैदल चलना या योग करना दिमाग के आकार को बढ़ाने में सहायक होता है। हैरानी की बात यह है कि अकेलापन और समाज से कटे रहना भी दिमागी बनावट में नकारात्मक बदलाव लाता है।

इंद्रियों की कमजोरी को न करें नजरअंदाज

न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार यदि आपको कम सुनाई देता है या आपकी आंखों की रोशनी कमजोर है और आप इसका इलाज नहीं करा रहे हैं तो आपके दिमाग को बाहरी दुनिया से पर्याप्त उत्तेजनासनहीं मिलती। यह दिमागी निष्क्रियता आगे चलकर सोचने-समझने की शक्ति को पूरी तरह क्षीण कर सकती है।

नशा और पोषण का अभाव

विटामिन B12 की कमी नसों के लिए घातक है जो दिमाग को सिकोड़ सकती है। इसके साथ ही शराब का अत्यधिक सेवन फ्रंटल लोब्स को भारी नुकसान पहुंचाता है और धूम्रपान नसों को सख्त कर देता है जिससे ब्रेन तेजी से बूढ़ा होने लगता है।

दिमाग को जवान रखने के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि पर्याप्त नींद लें सामाजिक मेलजोल बढ़ाएं और नियमित व्यायाम करें। अपने ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल की समय-समय पर जांच कराएं ताकि आपका मस्तिष्क लंबे समय तक सक्रिय और स्वस्थ रह सके।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए सुझाव केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें। नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।

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