

Breast Cancer Warning Signs: अक्टूबर को दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस माह के रूप में मनाया जाता है। इसका मकसद महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूक ककना और भेहद शुरुआती संकेतों और समय पर चिकित्सा के बारे में जागरूक करना है। ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाला दुनिया का सबसे आम कैंसर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 2024 में दुनियाभर में करीब 24 लाख महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला और 6.94 लाख महिलाओं की इससे मौत हुई।
IARC के GLOBOCAN 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के 1,92,020 नए मामले दर्ज किए गए थे, जो महिलाओं में सामने आए कुल नए कैंसर मामलों का करीब 26.6% था।
ब्रेस्ट कैंसर को लेकर एक आम धारणा यह है कि ब्रेस्ट में गांठ होने का मतलब ब्रेस्ट कैंसर है। ऐसा हर बार जरूरी नहीं है। कई बार इसके कुछ स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं, जबकि कुछ में गांठ के अलावा ब्रेस्ट या निप्पल में दूसरे बदलाव नजर आते हैं।
ब्रेस्ट या बगल में नई गांठ महसूस होना भी इसके शुरुआती संकेत हैं, इसकी डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। ब्रेस्ट के किसी हिस्से में असामान्य मोटापन या सूजन हो सकता है। इसलिए इसकी नियमित करनी चाहिए, जो स्वंय किया जा सकता है।
हालांकि, हर गांठ कैंसर नहीं होती। कई गांठें दूसरी स्थितियों की वजह से भी हो सकती हैं। इसलिए गांठ महसूस होने पर खुद से अनुमान लगाने या गूगल पर सर्च करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
अगर ब्रेस्ट की त्वचा पर अचानक गड्ढे पड़ने लगें, त्वचा किसी हिस्से में अंदर की ओर खिंची हुई दिखे या उसकी बनावट में कोई बदलाव आए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे बदलाव हमेशा कैंसर की वजह से नहीं होते, लेकिन नया और असामान्य बदलाव होने पर डॉक्टरी सलाह लेना बेहतर है।
निप्पल की सामान्य स्थिति में नया बदलाव, खासकर उसका अंदर की ओर घुसना, ब्रेस्ट कैंसर के संभावित संकेतों में शामिल है। यह बदलाव अचानक दिखाई दे या पहले की तुलना में अलग लगे तो इसे नजरअंदाज न करें।
स्तनपान न कराने की स्थिति में निप्पल से किसी तरह का असामान्य डिस्चार्ज, खासकर खून जैसा डिस्चार्ज हो, तो आपको जांच कराने की जरूर है। इसका मतलब सीधे कैंसर नहीं है, लेकिन असामान्य डिस्चार्ज को सामान्य मानकर छोड़ना भी सही नहीं है।
निप्पल के आसपास या ब्रेस्ट की त्वचा में नया लालपन, जलन या परतदार दिखना भी संभावित लक्षणों में शामिल है। अगर ऐसा बदलाव बना रहता है या सामान्य त्वचा से स्पष्ट रूप से अलग दिखाई देता है तो डॉक्टर से सलाह लें।
दोनों ब्रेस्ट का बिल्कुल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। प्राकृतिक रूप से आकार में थोड़ा अंतर हो सकता है। लेकिन अगर किसी एक ब्रेस्ट के आकार या शेप में नया और साफ दिखने वाला बदलाव दिखाई दे तो उस पर ध्यान देना चाहिए।
ब्रेस्ट का आकार और अलग महसूस होना, पीरियड्स, गर्भावस्था, वजन में बदलाव और कुछ दवाओं की वजह से भी बदल सकता है। इसलिए किसी बदलाव को देखकर घबराने के बजाय उसके बने रहने और दूसरे संकेतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
ब्रेस्ट के किसी हिस्से में दर्द होना भी एक लक्षण हो सकता है। इसी तरह बगल में नई गांठ या सूजन भी चिंता का विष हो सकता है। सिर्फ दर्द होने का मतलब ब्रेस्ट कैंसर होना नहीं है। ब्रेस्ट में दर्द के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। लेकिन नया, लगातार रहने वाला या असामान्य बदलाव हो तो इसकी जांच कराना बेहतर है।
WHO के अनुसार करीब 80% ब्रेस्ट कैंसर ऐसे मामलों में होते हैं जिनमें उम्र कोई कारक है ही नहीं। इसका मतलब यह है कि परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास न होने पर भी महिला को अपने ब्रेस्ट हेल्थ को लेकर जागरूक रहना चाहिए।