ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में क्यों हो जाती है देरी? हर महिला को जाननी चाहिए ये बातें

Breast Cancer Symptoms: ब्रेस्ट कैंसर भारत समेत दुनिया भर की महिलाओं में पाए जाने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है। इस बीमारी का सही समय पर पता चलना ही इसका बचाव है।
Female checking her breast for signs and symptoms of breast cancer.
एक महिला स्तन कैंसर के लक्षणों और संकेतों की जांच के लिए अपने स्तन की जांच कर रही है। (सोर्स सोशल मीडिया)
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Breast Cancer: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं परिवार, करियर और जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को अक्सर अपने ऊपर ध्यान नहीं देती हैं। यही लापरवाही आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों के समय रहते पहचानने में बाधा बन जाती है। ऐसी ही एक बीमारी है ब्रेस्ट कैंसर, जो भारत समेत दुनिया भर की महिलाओं में पाए जाने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है।

चिंताजनक बात यह है कि कई महिलाएं इसके शुरुआती संकेतों को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं या फिर संकोच, डर और जागरूकता की कमी के कारण समय पर जांच नहीं करातीं। नतीजा ये होता है, कि समय रहते बीमारी का पता नहीं चलता है और जब पता चलता है तब तक वह काफी आगे बढ़ चुकी होती है, जिससे इलाज और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

शुरुआती लक्षणों की अनदेखी खतरनाक

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह कहना है कि अधिकांश गंभीर बीमारियां शुरुआत में छोटे-छोटे लक्षणों के रूप में ही सामने आती हैं और यदि इन्हें समय रहते पहचान लिया जाए तो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का भी शुरुआती चरण में सफल इलाज संभव है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज की चेयरमैन मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. मीनू वालिया के अनुसार, भारत में बड़ी संख्या में महिलाएं ब्रेस्ट से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात करने या समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से हिचकिचाती हैं। सामाजिक संकोच, जागरूकता की कमी और नियमित जांच न कराने की प्रवृत्ति के कारण ब्रेस्ट कैंसर के कई मामले शुरुआती अवस्था में पकड़ में नहीं आ पाते। यही वजह है कि देश में बड़ी संख्या में महिलाओं में इस बीमारी का पता अपेक्षाकृत देर से चलता है।

ब्रेस्ट कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। जैसे: बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी, बढ़ता तनाव और हार्मोनल असंतुलन इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसके अलावा, मातृत्व की उम्र बढ़ना, पहली गर्भावस्था में देरी और कुछ अन्य प्रजनन संबंधी कारक भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को प्रभावित कर सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ समय-समय पर जांच और जागरूकता को इस जोखिम को कम करने का महत्वपूर्ण उपाय मानते हैं।

अनदेखी पड़ सकती है भारी

दुनिया भर के कई क्षेत्रों कि महिलयों को ब्रेस्ट कैंसर के बारे में जानकारी नहीं होती है, जैसे कि लक्षण क्या क्या होते है? जांच कैसे होती है। ऐसे में कई बार स्तन में बनने वाली गांठ, निप्पल से डिस्चार्ज, त्वचा में बदलाव को महिलाएं सामान्य मान लेती है।

जांच कराने में डर का लगना

आज भी कई देशों के कई इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव होने कि वजह से महिलायें समय रहते अस्पताल जाकर जांच नहीं कर पाती है। जिस वजह से उनकी बीमारियां गंभीर रूप ले लेती हैं। कई सरकारी अस्पतालों में तो आज भी ब्रेस्ट कैंसर कि जांच करने वाली मशीनें उपलब्ध नहीं है।

डॉक्टर से परामर्श में झिझक न करें

महिलायें डॉक्टर से परामर्श लेने में और उनको अपनी परेशानी बताने में डरती और झिझकती हैं। आज भी कई क्षेत्रों में महिलाएं स्तन संबंधी परेशानियों के बारे में घर पर बात नहींं कर पाती हैं।

लक्षणों को नजरंदाज न करें

अगेर आपको ब्रेस्ट में किसी तरह का दर्द या गांठ जैसे लक्षण नजर आए तो आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी जांच कराएं और ध्यान रहे डॉक्टर से परामर्श लिए बिना किसी भी तरह की मेडिसिन का सेवन न करें। अगर आप ऐसा करते है तो ब्रेस्ट कैंसर के अन्य प्रकार जैसे कि लोब्युलर ब्रेस्ट कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगाना मुश्किल होता है।

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