

Menstrual Cycle Explained: मासिक धर्म या चक्र एक नेचुरल प्रोसेस है, जो हर महीने महिलाओं के शरीर में होती है। यह कई चरणों से गुजरती है और प्रेग्नेंसी की संभावना को कंट्रोल करती है। महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण यह एक स्टेज से दूसरे स्टेज में बदलता रहता है।
मासिक धर्म चक्र की गिनती पहले दिन से की जाती है, जब ब्लीडिंग शुरू होती है। आमतौर पर, एक महिला का चक्र 28 दिनों का होता है। सामान्य तौर पर, मासिक धर्म को चार स्टेज में बांटा गया है-
मासिक धर्म चक्र का पहला चरण होता है। यही वह समय होता है, जब पीरियड्स शुरू होते हैं और आमतौर पर यह पांच दिन तक चलते हैं। आखिर शरीर में ब्लीडिंग क्यों होती है। आसान भाषा में समझें, तो यह ब्लड गर्भाशय (Uterus) की मोटी परत (Lining Of Uterus) के श्रेडिंग से निकलता है। जब कोई महिला गर्भधारण नहीं करती है, तब शरीर को इस परत की जरूरत नहीं होती और यह योनि के जरिए बाहर निकलने लगती है। इस दौरान निकलने वाला ब्लड मेंस्ट्रुअल फ्लूइड, म्यूकस और टिश्यू होता है।
मासिक चक्र के साथ शुरू होने वाला फॉलिक्यूलर फेज आमतौर पर 13 दिनों तक चलता है। इस दौरान मस्तिष्क के एक हिस्से हाइपोथैलेमस से पिट्यूटरी ग्लैंड को एक संकेत भेजा जाता है, जिससे फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन रिलीज होता है। इसी हार्मोन की वजह से ओवरी में 5 से 20 छोटे फॉलिकल्स बनते हैं। हर फॉलिकल में एक अपरिपक्व अंडा होता है, लेकिन केवल सबसे हेल्दी अंडा ही पूरी तरह परिपक्व होता है। बाकी फॉलिकल्स को बॉडी दोबारा से अब्जॉर्ब कर लेता है। यह 13-16 दिनों तक चलता है।
मासिक चक्र का यह चरण फर्टाइल विंडो कहलाता है। यह पीरयड प्रेग्नेंसी के लिए उपयुक्त होता है। मासिक धर्म चक्र के 14वें दिन, पिट्यूटरी ग्लैंड एक हार्मोन रिलीज करता है, जिसमें ओवरी) से मेच्योर एग निकलते है। यह एग फैलोपियन ट्यूब में प्रवेश करते है और यूटेरस की ओर जाते है। इन एग्स की लाइफ 24 घंटे की होती है। इस दौरान यदि एग और स्पर्म नहीं मिलते है, तो यह नष्ट हो जाता है।
इस स्टेज में शरीर अगले मासिक चक्र के लिए खुद को तैयार करता है। जैसे-जैसे हार्मोन रिलीज होता है, वैसे-वैसे शरीर की एनर्जी लो होने लगती है। जब फॉलिकल एग्स को छोड़ देता है, तो कॉर्पस ल्यूटियम डेवलप होता है। यह प्रोजेस्टेरोन और कम मात्रा में एस्ट्रोजन हार्मोन रिलीज करती है। कॉर्पस ल्यूटियम एक सिस्ट की तरह होती है, जो हर माह महिलाओं की ओवरी में बनती है। यह ओवरी में मौजूद कोशिकाओं से बनती है और मासिक चक्र के अंत में विकसित होती है।
हर किसी का मासिक चक्र अलग होता है। इसका आकलन करने के लिए आपको अपने पीरियड के पहले दिन से शरू करते हुए पीरियड के आखिरी दिन तक गिनती करना होगा। उदाहरण के लिए, अगर आपका पीरियड पहली जनवरी को शुरू और 5 जनवरी को ख़त्म होता है, तो आपको 1 जनवरी से गिनते हुए अगले पीरियड के आने तक इसकी गिनती करनी होगी और अगर आपका अगला पीरियड 30 जनवरी को आया तो आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल 1 जनवरी से शुरू होकर 30 जनवरी तक रहेगी, जिसका मतलब है कि आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल 30 दिनों की है। इस दौरान ध्यान देने वाली बात यह है कि पीरियड से पहले होने वाली स्पॉटिंग को पीरियड के पहले दिन के रूप में नहीं गिना जा सकता है। पीरियड तभी शुरू होता है जब रेगुलर ब्लीडिंग होती है।
एक शादी-शुदा महिला अगर आप सेक्सुअली एक्टिव है और आपका पीरियड नहीं आया है, तो हो सकता है कि आप प्रेगनेंट हों, लेकिन ऐसा हर बार जरूरी नहीं होता है। प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षणों जैसे टेंडर ब्रेस्ट, बहुत ज़्यादा थकान, मॉर्निंग सिकनेस, उल्टी आना, आदि का ध्यान रखें और इन लक्षणों में प्रेग्नेंसी टेस्ट करनी चाहिए।
रिसर्च बताती है कि मेंस्ट्रुएशन से जुड़ी अनियमितताओं का सीधा संबंध हार्मोनल डिसऑर्डर जैसे हाइपोथायरॉइडिज़्म से है। अगर इररेगुलर पीरियड के साथ-साथ अचानक वेटलॉस या वेटगेन होता है, हेयरफॉल या ब्लोटिंग व इरिटेबल बावेल जैसी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
यह इररेगुलर पीरियड का सबसे आम लक्षण है। इसके अलावा वजन बढ़ना, अत्यधिक बाल झड़ना, चेहरे पर बाल आना आदि। पीएमओएस एक सिंड्रोम है, जिसमें महिलाओं में एण्ड्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है।
तनाव और एंग्जायटी आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल पर बहुत गहरा असर डालते हैं। मेंस्ट्रुअल साइकिल से जुड़ी अनियमितता, पीरियड में देरी या फिर छोटी मेंस्ट्रुअल साइकिल, इन सबके लिए तनाव एक कारण हो सकता है, जो महिलाएं ज़्यादा चिंता करती हैं, उनमें मेंस्ट्रुअल अनियमितता बहुत आम है।
यह एक नेचुरल बायोलॉजिकल प्रोसेस है। इस स्टेज में मासिक धर्म धीरे-धीरे बंद होने लगता है। आमतौर पर यह 40 से 50 की उम्र में होता है। लगातार 12 महीने तक पीरियड्स न आने का मतलब है मासिक धर्म का समाप्त होना। यह तीन चरणों में होता है- प्री मेनोपॉज, मेनोपॉज और पोस्ट मेनोपॉज। इस दौरान आम तौर पर हॉट फ्लैशेज, रात को पसीना आना, अनियमित मासिक चक्र, मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और नींद न आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। प्री-मेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होता है।