Sabudana in Sawan: व्रत में क्यों खाया जाता है साबूदाना? जानें इसकी एनर्जी और न्यूट्रिशनल वैल्यू

Sabudana In Fasting: सावन के व्रत में साबूदाना खिचड़ी और खीर खूब खाई जाती है। जानें साबूदाना क्यों व्रत के लिए पसंद किया जाता है और इसमें मौजूद पोषक तत्व व सेहत से जुड़े फायदे क्या हैं।
Sabudana in sawan nutritional value health benefits fasting
साबुदानाफोटो.सोशल मीडिया
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Sabudana In Vrat: किसी भी व्रत-त्योहार में सबसे अधिक खाई जाने वाली फलाहारी सामग्री है- साबुदाना। सावन के व्रत में साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वड़ा और साबूदाना खीर जैसे व्यंजन भारतीय घरों में खूब बनाए और खाए जाते हैं। इसे व्रत के दौरान खाने के लिए उपयुक्त माना जाता है और यह कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होने के कारण शरीर को जल्दी ऊर्जा देता है।

सावन के व्रत में साबूदाना क्यों खाया जाता है?

व्रत के दौरान कई लोग गेहूं, चावल और दूसरे अनाज से परहेज करते हैं। ऐसे में साबूदाना एक लोकप्रिय विकल्प बन जाता है। इससे खिचड़ी, वड़ा और खीर जैसी कई चीजें बनाई जाती हैं। महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में यह व्रत के भोजन का अहम हिस्सा है। इसकी एक वजह इसकी आसान उपलब्धता भी हो सकती है।

साबूदाना में क्या होता है?

साबूदाना मुख्य रूप से टैपिओका यानी कसावा की जड़ से निकलने वाले स्टार्च से बनाया जाता है। यह ग्लूटेन-फ्री होने के साथ ही कार्बोहाइड्रेट वाला खाद्य पदार्थ है। इसलिए इसे खाने से शरीर को अन्य किसी भी फलाहारी भोजन की अपेक्षा जल्दी ऊर्जा मिलती है।

हालांकि, साबूदाना को प्रोटीन, फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का अच्छा स्रोत नहीं माना जाता। इसलिए केवल साबूदाना पर निर्भर रहने के बजाय इसे दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ खाना बेहतर है।

साबूदाना खाने के क्या फायदे हो सकते हैं?

इंस्टेंट एनर्जी सोर्स

साबूदाना में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, इसलिए व्रत के दौरान यह शरीर को जल्दी ऊर्जा उपलब्ध करा सकता है।

आसानी से पचता है

साबूदाना आमतौर पर हल्का और आसानी से पचने वाला माना जाता है, इसलिए व्रत के दौरान इसे कई लोग पसंद करते हैं।

ग्लूटेन-फ्री विकल्प

टैपिओका से बने साबूदाना में ग्लूटेन नहीं होता, इसलिए ग्लूटेन से परहेज करने वाले लोगों के लिए यह एक विकल्प हो सकता है।

क्या सिर्फ साबूदाना खाना पर्याप्त है?

साबूदाना मुख्य रूप से स्टार्च है और इसमें प्रोटीन व फाइबर काफी कम होते हैं। इसलिए साबूदाना खिचड़ी बनाते समय मूंगफली, दही, आलू या अन्य व्रत-अनुकूल पौष्टिक सामग्री शामिल करने से भोजन अधिक संतुलित हो सकता है। साबूदाना से मिलने वाली ऊर्जा और मूंगफली जैसे खाद्य पदार्थों से मिलने वाले प्रोटीन व फैट को साथ लिया जा सकता है। इससे यह एक कंप्लीट फूड बन जाता है।

डायबिटीज वालों को रखना चाहिए ध्यान

साबूदाना हाई-कार्ब फूड है और इसका सेवन ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है। इसलिए डायबिटीज या ब्लड शुगर की समस्या वाले लोगों को इसकी मात्रा और इसे किस चीज के साथ खा रहे हैं, इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

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सावन में साबूदाना खाएं, लेकिन संतुलित मात्रा में

साबूदाना सावन और व्रत की पारंपरिक भोजन संस्कृति का हिस्सा जरूर है, लेकिन इसे 'सुपरफूड' समझना सही नहीं होगा। यह मुख्य रूप से ऊर्जा देने वाला स्टार्च है। व्रत में इसे सीमित मात्रा में लेकर मूंगफली, दही, दूध, फल और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ संतुलित भोजन की तरह खाना बेहतर विकल्प हो सकता है।

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