World Post Day: डिजिटल इंडिया में भी क्यों जरूरी है डाकिया? चिट्ठियों से लेकर बैंकिंग सेवा तक बदल गई है भूमिका

India Post Services: मोबाइल और इंटरनेट के दौर में भी डाकिया क्यों जरूरी है? जानिए कैसे भारतीय डाक के जरिए घर बैठे बैंकिंग, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट और आधार से जुड़ी सेवाओं का लाभ मिल सकता है।
Digital india postman banking aadhaar services.
वर्ल्ड पोस्ट डेफोटो.सोशल मीडिया
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Postman Banking Services: मोबाइल और इंटरनेट के दौर में चिट्ठियां भले ही कम हो गई हों, लेकिन चिठ्ठियों को पहुंचाने वाले डाकिए की जरूरत खत्म नहीं हुई है। अब डाकिया का काम सिर्फ चिट्ठियां और पार्सल पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंकिंग और दूसरी जरूरी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में है।

खासकर दूर-दराज के गांवों में उन लोगों के तक, जिन्हें बैंक या सरकारी सेवा केंद्र तक पहुंचने में परेशानी होती है, वहां डाकिया की अहमियत आज भी बनी हुई है।

चिट्ठियों से आगे डाकिया की भूमिका

एक समय में जब डाकिया घर-घर चिट्ठियां, मनी ऑर्डर और जरूरी दस्तावेज पहुंचाता था। आज मैसेज के लिए मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ गया है, लेकिन पार्सल, ऑफिशियल डॉक्यूमेंट और दूसरी डाक सेवाओं की जरूरत अब भी वैसी ही है।

समय के साथ भारतीय डाक ने भी अपनी सर्विसेज को तकनीक से जोड़ा है। डाक विभाग के दिसंबर 2025 के डेटा के अनुसार, डाकियों और ग्रामीण डाक सेवकों को स्मार्टफोन और बायोमेट्रिक उपकरण दिए गए हैं, जिसका इस्तेमाल वे लोगों तक डिजिटल बैंकिंग जैसी सेवाएं पहुंचाने के लिए कर रहे हैं।

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घर बैठे मिल सकती हैं बैंकिंग सेवाएं

डिजिटल इंडिया में डाकिए का काम बैंकिंग सेवाओं से जुड़ गया है। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक यानी आईपीपीबी के माध्यम से डाकिया और ग्रामीण डाक सेवक भारतीय डाक सेवा की सुविधाओं को घर-घर तक पहुंचाने में मदद करते हैं।

इनमें बैंक खाता खोलने, नकदी जमा करने और निकालने तथा पैसे भेजने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इससे उन लोगों को मदद मिलती है, जिन्हें बैंक की शाखा तक जाने में समय, पैसे या हेल्थ प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है।

https://ippbonline.bank.in/web/ippb/services1

बुजुर्गों और पेंशन धारकों के लिए भी मददगार

पेंशन पाने वाले लोगों को हर साल लाइफ सर्टिफिकेट यानी जीवन प्रमाणपत्र जमा करना पड़ता है। ऐसे में डाक विभाग की डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट सेवा काम आती है। नवंबर 2025 में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आईपीपीबी के जरिए केंद्र और राज्य सरकार, सशस्त्र बल और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के पेंशनभोगी डाकिए की मदद से घर पर डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं। इससे प्रमाणपत्र जमा करने के लिए संबंधित कार्यालय जाने से बचा जा सकता है।

आधार से जुड़ी सेवाओं में भी है भूमिका

डाकघर अब सिर्फ डाक या चिठ्ठी भेजने की जगह नहीं रह गया हैं। भारतीय डाक के आधार केंद्रों पर आधार नामांकन और जरूरी जानकारियों को अपडेट कराने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा, डाक विभाग ने पांच साल से कम उम्र के बच्चों के आधार नामांकन और कुछ अन्य नागरिक सेवाओं को भी अपने डिजिटल सेवा नेटवर्क से जोड़ा है।

https://www.indiapost.gov.in/otheronlineservices/aadhaar-updation

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गांवों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद

इंटरनेट और मोबाइल होने के बावजूद हर व्यक्ति डिजिटल सेवा का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं है। कई लोगों को इसकी प्रक्रिया समझने, पहचान सत्यापित कराने या किसी सेवा का लाभ लेने में मदद की जरूरत होती है।

ऐसे में डाकिया तकनीक और आम लोगों के बीच एक कड़ी की तरह काम करता है। मार्च 2025 के आंकड़े बताते हैं कि देश में लगभग 1.64 लाख डाकघर हैं, जिनमें करीब 1.39 लाख ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं।

डिजिटल दौर में भी क्यों बनी हुई है डाकिए की जरूरत?

डिजिटल तकनीक ने सेवाओं को तेज और कई लोगों के लिए आसान बनाया है, लेकिन हर सेवा का लाभ उठाने के लिए केवल ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध होना काफी नहीं होता है। लोगों तक उस सुविधा का पहुंचना भी जरूरी है। डाकिया इसी जरूरत को पूरा करने में मदद करता है।

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