आज है ‘दत्तात्रेय जयंती, जानिए किसके पुत्र हैं भगवान दत्तात्रेय और किस मुहूर्त में करें पूजा
- Written By: वैष्णवी वंजारी
भगवान दत्तात्रेय जयंती
सीमा कुमारी
नवभारत डिजिटल टीम: हर साल मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन भगवान ‘दत्तात्रेय (Dattatreya Jayanti 2023) की जयंती’ मनाई जाती है। इस साल यह जयंती आज यानी 26 दिसंबर 2023 दिन मंगलवार को है।
मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा को दत्तात्रेय जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव के अंश भगवान दत्तात्रेय का जन्मोत्सव मनाया जाता है। दत्तात्रेय भगवान त्रिदेव का मिलाजुला रूप है। दत्तात्रेय जयंती पर तीनों देवताओं के बालरूप की पूजा की जाती है।
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योग और प्राणायाम के जन्मदाता भगवान दत्तात्रेय की जयंती इस दिन, पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजाविधि नोट कर लें
मान्यता है कि दत्तात्रेय भक्तों के स्मरण करने मात्र से उनकी सहायता के लिए उपस्थित होते हैं और सारे कष्ट हर लेते है। आइए जानें इस साल 2023 में भगवान दत्तात्रेय जयंती की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व
तिथि
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर 26 दिसंबर 2023 मंगलवार को दत्तात्रेय जयंती मनाई जा रही है। इस दिन अन्नपूर्णा जयंती भी है। भगवान दत्तात्रेय की पूजा करने से अधूरे कार्य पूरे हो जाते है। संतान प्राप्ति की कामना के लिए भी भगवान दत्तात्रेय की पूजा शुभ मानी जाती है।
शुभ मुहूर्त
दत्तात्रेय जयंती- 26 दिसंबर 2023 दिन मंगलवार ।
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ- 26 दिसंबर 2023 दिन मंगलवार को सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर शुरू।
पूर्णिमा तिथि समापन- 27 दिसंबर 2023 दिन बुधवार को सुबह 6 बजकर 2 मिनट पर समाप्ति।
प्रातः पूजा का शुभ मुहूर्त- 26 दिसंबर 2023 दिन मंगलवार सुबह 9 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक।
दोपहर पूजा का शुभ मुहूर्त- 26 दिसंबर 2023 दिन मंगलवार दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक।
संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त- 26 दिसंबर 2023 दिन मंगलवार शाम 7 बजकर 14 मिनट से लेकर रात्रि 8 बजे तक।
महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ‘दत्तात्रेय जयंती’ (Dattatreya Jayanti) में तीनों देव समाहित हैं। कहा जाता है कि, दत्तात्रेय भगवान महर्षि अत्रि और माता अनुसूया के पुत्र हैं। इन्हें भगवान और गुरु दोनों का स्वरूप माना गया है। इनके स्वरूप की बात करें, तीन मुख और 6 हाथ हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दत्तात्रेय भगवान ने अपने 24 गुरु बनाए थे। जो जातक दत्तात्रेय भगवान की पूजा करते हैं उन्हें त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही अथाह ज्ञान की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, दत्तात्रेय भगवान परशुराम जी को श्रीविद्या मंत्र सिखाया था, जो यह विद्या सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
