मां दुर्गा का एक ऐसा भी शापित मंदिर, यहां बाहर से ही मत्था टेककर लौट जाते हैं भक्त, जानें रहस्य
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत जहां पर हो गई हैं वहीं पर माता दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए भक्त मंदिर में पहुंचते हैं इस दौरान माता दुर्गा के ऐसे भी मंदिर हैं जहां पर दर्शन करने जाने के लिए भी भक्त डरते है।
- Written By: दीपिका पाल
देवास में स्थित हैं मां दुर्गा का शापित मंदिर (सौ.सोशल मीडिया)
Mysterious Temple of maa Durga:शारदीय नवरात्रि की शुरुआत जहां पर हो गई हैं वहीं पर माता दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए भक्त मां के मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस दौरान माता के प्रसिद्ध और खास मंदिरों में भक्त सच्चे मन से अपनी मनोकामना लेकर पहुंच रहे हैं तो देश में कई मंदिर ऐसे भी हैं जहां पर भक्त अंदर जाने से भी डरते हैं। इन मंदिर में भक्त बाहर से भी दर्शन करके लौट आते है। जानिए इस मंदिर का रहस्य औऱ यह मंदिर किस जगह पर स्थित है।
सूर्यास्त के बाद कोई नहीं जाता मंदिर
माता दुर्गा का यह मंदिर मध्यप्रदेश के देवास जिले में स्थित हैं जहां भक्त जाने से डरते हैं सुबह औऱ दोपहर में तो बाहर से दर्शन कर लेतें है लेकिन सूर्यास्त के बाद कोई भी भक्त मंदिर में दर्शन के लिए नहीं आता है। कहा जाता हैं जो भी भक्त सूर्यास्त के बाद इस मंदिर में आए उनके साथ अजीबोगरीब घटनाएं घटी हैं। इतना ही नहीं इस मंदिर से बेहद ही डरावनी आवाज आती हैं तो वहीं पर कभी मंदिर में शेरों के दहाड़ने की आवाज आती है और कभी घंटों का नाद सुनाई देता है। अगर इस मंदिर में सच्चे मन के साथ कोई भक्त आता हैं तो उसके साथ कुछ नहीं होता है लेकिन गलत इरादे से आए व्यक्ति का यह मंदिर बुरा हाल कर देता है।
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जानिए मंदिर के पीछे की कहानी
इस मंदिर के शापित कहलाने के पीछे एक कहानी प्रचलित है। इसे लेकर देवास के स्थानीय बताते हैं कि, इस मंदिर को जिले के महाराजा ने मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था के चलते बनवाया था। इसके बनने के बाद राजघराने में अशुभ घटनाएं होने लगीं। बताया जा रहा हैं कि, राजा की बेटी का सेनापति के साथ प्रेम संबंध था जिसे लेकर जब राजा को यह बात पता चली तो उन्होंने इसका विरोध किया और बेटी को जेल में डाल दिया। इसे लेकर कहा गया कि, जेल में रहने के कारण जेल में ही राजकुमारी की रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई।
वहीं, राजकुमारी की मौत की खबर के बाद सेनापति ने भी मंदिर में आत्महत्या कर ली, जिसके बाद राजपुरोहितों ने बताया कि ये मंदिर अपवित्र हो चुका है। यहां से माता की प्रतिमा को राजपुरोहितों की सलाह पर राजा ने पूरे सम्मान के साथ बड़े गणेश मंदिर में स्थापित कर दी। इधर मंदिर में मूर्ति नहीं होने के बाद भी मंदिर में दर्शन के लिए भक्त पहुंचते है।
