
बच्चों में डाउन सिंड्रोम का खतरा (सोशल मीडिया)
नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: नवजात बच्चों (NewBorn Baby) में प्रेग्नेंसी के दौरान ही कई बड़ी बीमारियों का खतरा सताने लगता है यहां पैरेंट्स से किसी ना किसी विकृति के चलते खतरा होता है। ऐसे में ही डाउन सिंड्रोम ( Down Syndrome) भी कुछ ऐसी ही बीमारी है जो प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे को होती है। इस बीमारी को जेनेटिक बीमारी कहा जाता है जिसमें बच्चा अन्य बच्चों की तरह नॉर्मल नहीं होता है उसमें विकार होते है। आज World Down Syndrome Day 2024 है इसके मौके पर हम आपको जानकारी देगें।
इस बीमारी डाउन सिंड्रोम की बात करें तो, यह एक तरीके से एक जेनेटिक डिसऑर्डर है जो दो विपरित लिंगों के लोगों में क्रोमोसोम की गड़बड़ी से पैदा होता है। इस बीमारी में जैसे-जैसे गर्भधारण करने की उम्र बढ़ती है इस बीमारी का खतरा होने लगता है जो महिलाएं 35 या उसके बाद गर्भवती होती है उनमें कम उम्र में गर्भवती होने वाली महिलाओं की तुलना में डाउन सिंड्रोम से प्रभावित गर्भावस्था की संभावना अधिक होती है।
ॉ डाउन सिंड्रोम से कैसे करें बचाव (सोशल मीडिया)
यहां पर इस बीमारी में माना जाता है कि, जिस व्यक्ति के अंदर एक एक्स्ट्रा क्रोमोजोम पाया जाता है। जिसे विस्तार से समझे तो, एक बच्चा 46 क्रोमोसोम के साथ जन्म लेता है। 23 माता से और 23 पिता से, यह क्रोमोसोम जोड़े में मौजूद होते हैं। इसमें क्रोमोसोम 21 की एक अतिरिक्त कॉपी होती है। इसकी वजह से डाउन सिंड्रोम की बीमारी बच्चे में पनपती है। इस बीमारी में क्रोमोसोम की संख्या 47 होती है एक अतिरिक्त क्रोमोसोम की वजह से।
बच्चे को अगर डाउन सिंड्रोम जैसी बीमारी होती है तो इसके कई इस प्रकार लक्षण नजर आते है, जो इस प्रकार है..
इस बीमारी में बच्चे को कई तरह की दिक्कतें हो जाती है इसमें इस प्रकार है…
बच्चों में होने वाले इस डाउन सिंड्रोम के खतरे को रोकने के लिए कोई इलाज और आसान निदान मौजूद नहीं है। इस बीमारी से आई दिक्कतों को ठीक किया जा सकते है जैसे कान में सुनाई नहीं दे तो बच्चे को आवाज सुनने वाली मशीन दे सकते है। इस बीमारी के बच्चे को सामान्य बच्चे के साथ रहने दिया जाता है लेकिन ज्यादा दिक्कत होने की वजह से इन बच्चों के लिए अलग स्कूल और शिक्षण व्यवस्था होती है।






