माइग्रेन की समस्या में राहत देता है भ्रामरी प्राणायाम, जानिए इसके खास फायदे
इस भ्रामरी अभ्यास को निरंतर करने से दिमाग की नसों को फायदा मिलता है। इसके अलावा माइग्रेन के लिए सबसे खास भ्रामरी आसन को बताया गया है।
- Written By: दीपिका पाल
भ्रामरी प्राणायाम के फायदे (सौ. सोशल मीडिया)
योग, हमारे जीवन का हिस्सा है जिसके बिना अच्छी सेहत की शायद ही कल्पना की जा सकती है। दिमाग और शरीर को संतुलन को बनाए रखने के लिए प्राणायाम सबसे खास होता है जिसका निरंतर अभ्यास करना चाहिए। पुराने समय से ही हम भ्रामरी प्राणायाम को करते है आए है जो शारीरिक औऱ मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
यह आसन भंवरे की तरह ही सांस छोड़ने का काम करता है। भ्रामरी प्राणायाम को रोजाना करने से इसके फायदे मिलते है। इसका अभ्यास रोजाना करने से मन शांत रहता है और मानसिक संतुलन बेहतर होता है।
जानिए माइग्रेन के लिए कितना फायदेमंद है प्राणायाम
आपको बताते चलें कि, माइग्रेन सबसे गंभीर बीमारी इन दिनों बनती जा रही है। इस भ्रामरी अभ्यास को निरंतर करने से दिमाग की नसों को फायदा मिलता है। इसके अलावा माइग्रेन के लिए सबसे खास भ्रामरी आसन को बताया गया है। यह भंवरे या मधुमक्खी जैसी आवाज में सांस छोड़ता है तो इसका फायदा दिमाग को होता है। माइग्रेन को नियंत्रित करने के लिए भ्रामरी प्राणायाम करने से माइग्रेन का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है, रोजाना कुछ मिनट का अभ्यास आपके सिरदर्द की समस्या को राहत दे जाता है।
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भ्रामरी प्राणायाम करने के फायदे
यहां पर भ्रामरी प्राणायाम करने के कई फायदे होते है जिसके बारे में आपको जानना चाहिए।
1- इस प्राणायाम को करने से दिमाग शांत होता है तो वहीं पर तनाव जैसी समस्या को कंट्रोल करता है।
2- इस प्राणायाम को आप निरंतर करते है तो, दिमाग और नसों को आराम मिलता है, जिससे सोचने-समझने की ताकत भी बढ़ती है।
3-अगर आप हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे है तो आपको भ्रामरी प्राणायाम करना चाहिए। यह अभ्यास दिमाग को ठंडक पहुंचाता है और नसों के तनाव को कम करता है।
4- मन की शांति के लिए भ्रामरी प्राणायाम सबसे बेस्ट होता है इसे आप निरंतर अभ्यास के साथ कर सकते है।
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जानिए कैसे करते है भ्रामरी प्राणायाम
यहां पर आप रोजाना भ्रामरी प्राणायाम कर सकते है जिसे करना बेहद आसान है। भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले किसी शांति वाली जगह पर आराम से बैठ जाएं. फिर आंखें बंद कर लें और दोनों हाथों की उंगलियों से हल्के से कान और आंखों को ढक लें। अब मुंह बंद रखते हुए नाक से धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें।जब सांस छोड़ें तो हल्की मधुमक्खी की तरह एक भनभनाहट की आवाज करें. ऐसा करने से दिमाग में एक हल्का सा कंपन महसूस होता है, जो मानसिक शांति और ध्यान बढ़ाने में मदद करता है।
