पाकिस्तान की खोली पोल, सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने जापान और UAE को बताया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का सच
भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का पाकिस्तान से बदला लेने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की काली करतूतों को उजागर करने के लिए सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों को विभिन्न देशों में भेज रहा है।
- Written By: अमन उपाध्याय
टोक्यो पहुंचा भारत का सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल, फोटो ( सो. सोशल मीडिया )
अबू धाबी/टोक्यो: पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए एक व्यापक कूटनीतिक अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत 7 सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों को 33 देशों की राजधानियों में भेजा जा रहा है।
इसी क्रम में, गुरुवार को पहले दो प्रतिनिधिमंडल जापान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पहुंचे, जहां उन्होंने पाकिस्तान की नीतियों और आतंकवाद से जुड़े सबूत प्रस्तुत किए। भारतीय प्रतिनिधिमंडलों ने अपने मित्र देशों को पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों के बारे में पूरी जानकारी दी।
#WATCH | The all-party delegation of MPs led by Shiv Sena MP Shrikant Shinde met with Dr. Ali Rashid Al Nuami, Chairman of the Defence Affairs, Interior & Foreign Affairs Committee, UAE Federal National Council in Abu Dhabi today pic.twitter.com/RCB9vo12Jo — ANI (@ANI) May 22, 2025
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आतंकवादी खतरे को किया उजागर
यूएई पहुंचे प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे कर रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल ने अबू धाबी में यूएई की फेडरल नेशनल काउंसिल के सदस्य अहमद मीर खोरी से मुलाकात की। बैठक में उन्होंने पाकिस्तान से उत्पन्न आतंकवाद और भारत की सुरक्षा नीति के बारे में विस्तार से चर्चा की। डॉ. शिंदे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि उन्होंने गर्व के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत की बड़ी सफलता साझा की और पाकिस्तान से आ रहे आतंकवादी खतरे को उजागर किया।
इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के मनन कुमार मिश्रा, अतुल गर्ग, बांसुरी स्वराज, एस.एस. अहलूवालिया, बीजद के सस्मित पात्रा, आईयूएमएल के ई.टी. मोहम्मद बशीर, पूर्व राजनयिक सुजान आर. चिनॉय और यूएई में भारत के राजदूत संजय सुधीर भी शामिल हैं। भारतीय दूतावास ने कहा कि यूएई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी करने वाला पहला देश बन गया है, जो दोनों देशों के गहरे द्विपक्षीय रिश्तों को दर्शाता है।
पूरी मानवता के लिए एक गंभीर खतरा
यूएई की संघीय राष्ट्रीय परिषद में रक्षा, आंतरिक और विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष डॉ. अली राशिद अल नूमी ने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म या जाति नहीं होती, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद केवल किसी एक देश या क्षेत्र का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक समस्या है। इसलिए, उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर इस चुनौती का सामना करना चाहिए।
टोक्यो पहुंचा भारत का प्रतिनिधिमंडल
वहीं, दूसरा प्रतिनिधिमंडल भी जापान पहुंचा है, जिसने पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे आतंकवाद की पूरी सच्चाई सबके सामने रखी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जदयू सांसद संजय कुमार झा कर रहे हैं। उनके साथ भाजपा की सांसद अपराजिता सारंगी, बृजलाल, प्रधान बरुआ, हेमांग जोशी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी, माकपा के जॉन ब्रिटास, और पूर्व राजदूत मोहन कुमार भी शामिल हैं।
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टोक्यो में भारतीय दूतावास ने बयान जारी करते हुए कहा कि संजय कुमार झा के नेतृत्व में यह सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जापान पहुंचा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त कार्रवाई को सबके सामने उजागर किया जाएगा।
#WATCH | Tokyo | On Operation Sindoor, Satoru Nagao, Fellow (Non-resident) Hudson Institute, says, “It was a responsible attack targeting only terrorist camps. It was a proper response and a good example of punishment. It was a good response to state-sponsored terrorism.” On the… pic.twitter.com/0JWiS1TCgG — ANI (@ANI) May 22, 2025
ऑपरेशन सिंदूर पर हडसन इंस्टीट्यूट के फेलो सतोरू नागाओ ने कहा कि भारत ने आतंकवादियों के खिलाफ बिलकुल सही और उचित कदम उठाया है। यह हमला केवल आतंकवादी शिविरों को लक्षित कर किया गया था, जो एक जिम्मेदाराना कार्रवाई थी। यह एक सही प्रतिक्रिया थी और एक प्रभावशाली सजा का उदाहरण भी है।
आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गए थे। इसके जवाब में भारत ने 6-7 मई की रात पाकिस्तान और पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक और लक्षित हवाई हमले किए। इसके बाद पाकिस्तान ने 8 से 10 मई के बीच भारतीय सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करने का प्रयास किया, जिसका भारत ने कड़ा मुकाबला किया। दोनों देशों के सैन्य प्रमुखों के बीच 10 मई को हुई बातचीत के बाद युद्धविराम पर सहमति बनी और दोनों पक्षों ने सैन्य कार्रवाई बंद कर दी।
