अपने पैतृक गांव पहुंचे CJI गवई, पुण्यतिथि पर पिता को अर्पित की श्रद्धांजलि
CJI BR Gavai Amravati Visit: सीजेआई बी आर गवई ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के अमरावती जिले में अपने पैतृक गांव दारापुर पहुंचे। उन्होनें यहां अपने पिता आर एस गवई के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
- Written By: आकाश मसने
सीजेआई बीआर गवई (सोर्स: सेालश मीडिया)
Amravati News: भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के अमरावती जिले में अपने पैतृक गांव दारापुर पहुंचे। यहां उन्होंने अपने पिता और केरल व बिहार के पूर्व राज्यपाल आरएस गवई के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। सीजेआई गवई अपने परिवार के सदस्यों के साथ अपने गांव में पिता की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने दिवंगत आर एस गवई के स्मारक पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।
इस दौरान सीजेआई गवई ने दारापुर गांव की ओर जाने वाले रास्ते पर बनने वाले एक भव्य द्वार की आधारशिला भी रखी। इस प्रवेश द्वार का नाम सीजेआई के पिता आरएस गवई के नाम पर रखा गया है। उन्हें प्यार से दादासाहेब गवई कहा जाता था।
प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई शुक्रवार शाम को अमरावती जिले के दरियापुर में एक अदालत के एक भवन का उद्घाटन करेंगे। वहीं शनिवार को अमरावती जिला एवं सत्र अदालत में दिवंगत टीआर गिल्डा मेमोरियल ई-लाइब्रेरी का उद्घाटन करेंगे। इससे स्थानीय अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों को डिजिटल लीगल रिसोर्सेज की बेहतर पहुंच मिलेगी।
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गवई इसी साल बने सीजेआई
बता दें कि न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने इसी साल 14 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वह देश की न्यायपालिका का नेतृत्व करने वाले पहले बौद्ध बन गए हैं।
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1985 में शुरू की वकालत
जानकारी के लिए बता दें कि सीजेआई भूषण रामकृष्ण गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले में हुआ। उन्होंने 16 मार्च 1985 को अपनी वकालत शुरू की। उन्होंने अपने करियर के शुरुआत में पूर्व महाधिवक्ता और हाईकोर्ट के जज बैरिस्टर राजा एस. भोसले के साथ 1987 तक काम किया। इसके बाद 1987 से 1990 तक बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस की।
1990 तक बॉम्बे हाई कोर्ट में रहे
जस्टिस बीआर गवई 1990 के बाद मुख्य रूप से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ में प्रैक्टिस की। इसके बाद नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के लिए भी वो स्थायी वकील रहे। इसके अलावा, उन्होंने सीकोम, डीसीवीएल जैसी विभिन्न स्वायत्त संस्थाओं, निगमों तथा विदर्भ क्षेत्र की कई नगर परिषदों के लिए नियमित रूप से पैरवी की।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
