रांची में धूमधाम से निकली भगवान जगन्नाथ की 335वीं ऐतिहासिक रथयात्रा, उमड़े लाखों श्रद्धालु
Rachi Jagannath Rath Yatra: रांची में जगन्नाथपुर मंदिर से भगवान जगन्नाथ की 335वीं ऐतिहासिक रथयात्रा श्रद्धा और उल्लास के साथ निकली। हजारों श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर मौसीबाड़ी पहुंचाया।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
रांची भगवान जगन्नाथ रथयात्रा (सोर्स-सोशल मीडिया)
Jharkhand Jagannath Mandir Rath Yatra 2026: झारखंड की राजधानी रांची में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की 335वीं ऐतिहासिक रथयात्रा श्रद्धा, परंपरा और सामाजिक समरसता के साथ निकाली गई। जगन्नाथपुर मंदिर से मौसीबाड़ी तक निकली इस भव्य यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और भगवान के रथ की रस्सियां खींचकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
जय जगन्नाथ के उद्घोष, शंखनाद और भक्ति गीतों के बीच भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के विग्रहों को भव्य रथ पर विराजमान कर मौसीबाड़ी के लिए रवाना किया गया। पारंपरिक पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठानों के बाद भगवान के विग्रहों को रथ पर स्थापित किया गया। इस विशाल यात्रा में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन भी मौजूद रहें।
लाखों श्रद्धालु रथयात्रा हुए शामिल
रथयात्रा शुरू होते ही श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया। हजारों श्रद्धालुओं ने रथ की रस्सियां थामकर उसे करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित मौसीबाड़ी तक खींचा। भगवान जगन्नाथ नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद घुरती रथयात्रा के साथ उनकी मुख्य मंदिर में वापसी होगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी रथयात्रा में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने अपने संदेश में कहा कि महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा की कृपा सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का संचार करे।
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देश की सबसे पुरानी रथयात्रा में गिनी जाती है
उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा सेवा, समरसता, आस्था और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। रांची की रथयात्रा देश की सबसे पुरानी रथयात्राओं में गिनी जाती है। इसकी शुरुआत वर्ष 1691 में नागवंशी शासक ऐनीनाथ शाहदेव ने की थी। पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर से प्रेरित होकर उन्होंने जगन्नाथपुर पहाड़ी पर मंदिर का निर्माण कराया और उसी परंपरा के अनुरूप यहां रथयात्रा की शुरुआत की। आज यह आयोजन झारखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
रथयात्रा को खिंचना पुण्य कार्य माना जाता है- सीएम
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि जगन्नाथपुर मंदिर की वास्तुकला और पूजा-पद्धति पुरी के जगन्नाथ मंदिर से काफी हद तक मेल खाती है। यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की काष्ठ निर्मित प्रतिमाओं की पारंपरिक विधि से पूजा की जाती है। रथयात्रा के दौरान रथ खींचने को श्रद्धालु विशेष पुण्य का कार्य मानते हैं। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सामाजिक समरसता है।
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नौ दिवसीय मेले का होता है आयोजन
उन्होंने आगे कहा कि वर्षों से विभिन्न जातियों और समुदायों के लोग मंदिर और रथयात्रा की व्यवस्थाओं में अपनी पारंपरिक जिम्मेदारियां निभाते आ रहे हैं। यही परंपरा रांची की रथयात्रा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सौहार्द का भी प्रतीक बनाती है। रथयात्रा के साथ शुरू हुए नौ दिवसीय मेले में झारखंड सहित पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
