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झारखंड की धरती पर ‘काला सोना’ या मौत का सौदा? 27,000 एकड़ में फैली अफीम की खेती पर विधानसभा में उठे सवाल

Illegal Drug Trade: झारखंड की शांत वादियों और घने जंगलों के बीच क्या कोई बहुत बड़ा 'काला खेल' चल रहा है? यह सवाल आज राज्य की विधानसभा में तब गूंजा जब अफीम की खेती के ऐसे चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए।

  • Written By: प्रतीक पांडेय
Updated On: Mar 09, 2026 | 05:20 PM

झारखंड विधानसभा में उठा अफीम की खेती का मामला, फोटो- सोशल मीडिया

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Opium cultivation Jharkhand: झारखंड में अवैध रूप से हो रही अफीम की खेती का मुद्दा आज विधानससभा में उठाया गया। दरअसल पिछले कई सालों की तुलना में अफीम की खेती का दायरा अधिक बढ़ गया है। साथ ही इस अवैध खेती को संरक्षण देने की भी बात कही जा रही है। मुद्दे पर सत्तापक्ष ने अपनी बात भी रखी है।

झारखंड में महज कुछ सालों के भीतर अफीम की अवैध खेती का दायरा अचानक 10 गुना बढ़ जाना कोई सामान्य घटना नहीं है। यह न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि झारखंड की आने वाली पीढ़ी को नशे के जानलेवा दलदल में धकेलने की एक सोची-समझी साजिश की ओर भी इशारा करता है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर हुई तीखी चर्चा ने यह साफ कर दिया है कि राज्य के कई इलाकों में अफीम की जड़ें उम्मीद से कहीं ज्यादा गहरी हो चुकी हैं।

4 साल में 10 गुना कैसे बढ़ गया अफीम का रकबा?

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान लिट्टिपाड़ा से विधायक हेमलाल मुर्मू ने जब अफीम की खेती से जुड़े सरकारी आंकड़े पटल पर रखे, तो सदन में सन्नाटा पसर गया। आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि झारखंड में अवैध अफीम का कारोबार कितनी तेजी से अपने पैर पसार रहा है। साल 2020-21 में जहां लगभग 2871 एकड़ भूमि पर अफीम की खेती पाई गई थी, वहीं अगले दो सालों में यह बढ़कर 5494 एकड़ और फिर 4853 एकड़ तक पहुंच गई।

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लेकिन सबसे डरावनी तस्वीर साल 2024-25 की है। इस एक साल के भीतर अफीम की खेती का क्षेत्रफल अचानक छलांग लगाकर 27,215 एकड़ तक पहुंच गया है। यह उछाल इतना बड़ा है कि इसने पूरी प्रशासनिक मशीनरी पर सवालिया निशान लगा दिया है। विधायक मुर्मू ने सीधे तौर पर पूछा कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में हो रही अवैध खेती किसकी नाक के नीचे और किसके संरक्षण में फल-फूल रही है? इतने बड़े पैमाने पर खेती होना और प्रशासन को इसकी भनक तक न लगना, अपने आप में कई संदिग्ध कहानियों को जन्म देता है।

संरक्षण और मिलीभगत का संदेह, सदन में गूंजे तीखे सवाल

अफीम की खेती केवल एक कृषि संबंधी अपराध नहीं है, बल्कि यह संगठित अपराध का एक बड़ा हिस्सा है। सदन में चर्चा के दौरान विधायक ने सरकार से यह भी जानकारी मांगी कि पिछले चार वर्षों में इस अवैध धंधे से जुड़े कितने मुकदमे दर्ज किए गए और उनमें से कितनों की जांच पूरी हुई है। सबसे बड़ी चिंता उन ‘सफेदपोशों’ और संरक्षकों को लेकर जताई गई, जिनके इशारे पर यह अवैध कारोबार बेखौफ चल रहा है।

मुर्मू ने जोर देकर कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में खेती बिना किसी स्थानीय या प्रभावशाली संरक्षण के संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट किया कि इस मामले में अब तक कितने लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गई है। यह मुद्दा केवल कानूनी उल्लंघन का नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक सरोकार से भी जुड़ गया है क्योंकि अफीम की यह फसल अंततः नशे के रूप में राज्य के युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने वाली है।

क्या केवल फसल नष्ट करना ही काफी है?

विपक्ष और विधायकों के कड़े सवालों के बीच सरकार की ओर से मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने मोर्चा संभाला। उन्होंने सदन में यह स्वीकार किया कि साल 2024-25 में राज्य के विभिन्न जिलों में रिकॉर्ड 27,215 एकड़ भूमि पर अफीम की अवैध खेती के मामले सामने आए हैं।

यह भी पढ़ें: इंडिगो की फ्लाइट में एक घंटे तक फंसे रहे यूपी के दोनों डिप्टी सीएम, तकनीकि खराबी बनी कारण

मंत्री ने बचाव करते हुए कहा कि प्रशासन हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा है और विशेष अभियान चलाकर इस अवैध खेती को बड़े पैमाने पर नष्ट किया गया है। मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि मादक पदार्थों की तस्करी और खेती को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार लगातार अभियान चला रही है। जब उनसे अधिकारियों की मिलीभगत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल झारखंड पुलिस विभाग के किसी भी अधिकारी की संलिप्तता का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, उन्होंने यह कड़ी चेतावनी भी दी कि यदि भविष्य में किसी भी स्तर पर किसी अधिकारी या व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो सरकार उसके खिलाफ ऐसी कार्रवाई करेगी जो नजीर बनेगी।

Jharkhand illegal opium cultivation assembly discussion illegal drug trade

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Published On: Mar 09, 2026 | 05:19 PM

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