नहीं थम रहा बादल फटने का सिलसिला, रामबन जिले में फ्लैश फ्लड ने मचाई तबाही, 3 की मौत
Cloudburst: अगस्त में जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में मौसम ने कहर बरपाया। ताजा मामला रामबन जिले के राजगढ़ इलाके का है जहां ऊपरी क्षेत्रों में बादल फटने और भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ आ गई।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो- सोशल मीडिया
Flash Flood in Jammu and Kashmir: रामबन जिले में आई इस प्राकृतिक आपदा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है जबकि चार अन्य अभी भी लापता हैं। बाढ़ के पानी के तेज बहाव में कई मकान बह गए, जिससे स्थानीय लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू टीमें तैनात हैं, जो लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। वहीं, विस्थापित लोगों के लिए अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि हालात पर करीबी निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राहत टीमें भी भेजी जा सकती हैं। हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। रेस्क्यू टीम पीड़ित इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं जिससे लापता लोगों को तलाश की जा सके।
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लगातार हो रही घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
इस महीने में जम्मू-कश्मीर को कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा है। अगस्त के पहले सप्ताह से ही भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाएं पूरे जम्मू क्षेत्र में तबाही मचा रही हैं। बीते एक हफ्ते में हुई मूसलधार बारिश से जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी और डोडा जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इन घटनाओं में अब तक 36 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। अकेले रियासी और डोडा जिलों में 9 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है। कई जगहों पर भूस्खलन के कारण सड़कें अवरुद्ध हो गईं और नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया।
किश्तवाड़ ने देखी भयानक तबाही
14 अगस्त को भी किश्तवाड़ जिले के चिशोटी गांव में एक भीषण बादल फटने की घटना सामने आई थी। यह गांव माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग के पास स्थित है और समुद्र तल से लगभग 9,000 फीट की ऊंचाई पर है। इस हादसे में कम से कम 60 लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल या लापता हो गए थे। बादल फटने से आई तेज बाढ़ में श्रद्धालुओं के कैंप, स्थानीय घर और पुल बह गए थे। इस घटना की सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि क्षेत्र में सामान्य वर्षा दर्ज की गई थी, लेकिन क्लाउडबर्स्ट की वजह से सीमित क्षेत्र में भारी जलप्रवाह आ गया, जिसने पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया।
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क्या कहते हैं मौसम विशेषज्ञों
जम्मू-कश्मीर में इस तरह की लगातार आपदाएं राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता और बुनियादी ढांचे के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते मौसम पैटर्न और जलवायु परिवर्तन की वजह से पहाड़ी इलाकों में इस तरह की घटनाएं अब और अधिक बार घट सकती हैं। सरकार और प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह ऐसे संकटों से निपटने के लिए स्थायी समाधान और बेहतर पूर्व चेतावनी तंत्र विकसित करें।
