फारूक अब्दुल्ला पर हमला करने वाला कमल सिंह, फोटो- सोशल मीडिया
Farooq Abdullah Security Breach: जम्मू की आबो-हवा में बुधवार की शाम खुशियों और शहनाइयों की गूंज थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि इन खुशियों के बीच मौत का एक पुराना मंसूबा दबे पांव दाखिल हो चुका है। जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में स्थित ‘होटल रॉयल पार्क’ में एक वकील की शादी का समारोह चल रहा था, जहां राजनीति के दिग्गज जुटे थे। पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला भी वहां मौजूद थे।
जैसे ही वह कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलने लगे, अचानक एक बुजुर्ग व्यक्ति भीड़ को चीरते हुए उनके बिल्कुल करीब पहुंचा और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। यह पल इतना भयावह था कि वहां मौजूद लोगों की सांसें थम गईं। गनीमत रही कि सुरक्षाकर्मियों की फुर्ती ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।
यह घटना बुधवार की रात उस समय हुई जब डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी के साथ शादी समारोह से विदा ले रहे थे। सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि हमलावर पीछे से आता है और सीधे पूर्व मुख्यमंत्री के सिर के पास अपनी पिस्तौल ले जाता है।
उसने पूरी ताकत से ट्रिगर दबाया, लेकिन उसी क्षण एनएसजी और जम्मू-कश्मीर पुलिस के कमांडो हरकत में आ गए। उन्होंने हमलावर का हाथ झटक दिया, जिससे गोली का निशाना चूक गया। इस अफरा-तफरी में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को भी मामूली चोटें आईं, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। यह पूरी घटना किसी डरावनी फिल्म के सीन जैसी थी, जिसने सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ाकर रख दीं।
हमलावर की पहचान 70 वर्षीय कमल सिंह जामवाल के रूप में हुई है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी है। पुलिस हिरासत में जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने जो खुलासा किया, वह किसी को भी हैरान कर सकता है। जामवाल ने दावा किया कि वह पिछले 20 सालों से फारूक अब्दुल्ला की हत्या की योजना बना रहा था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हमले के समय आरोपी नशे की हालत में था और उसके पास से बरामद पिस्तौल लाइसेंसी बताई जा रही है।
हमलावर कमल सिंह ने इसे खुद का व्यक्तिगत एजेंडा बताया। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां अब उसके मानसिक स्वास्थ्य और पुराने रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नफरत के पीछे की असली वजह क्या है।
इस हमले ने जम्मू-कश्मीर में वीवीआईपी सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉ. फारूक अब्दुल्ला को जेड प्लस (Z+) श्रेणी के साथ एनएसजी सुरक्षा कवच मिला हुआ है। ऐसे में एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल लेकर उनके इतने करीब कैसे पहुंच गया, यह जांच का सबसे बड़ा विषय है। उपमुख्यमंत्री चौधरी ने इसे सुरक्षा में एक बहुत बड़ी चूक करार दिया है।
उनका कहना है कि जब राज्य के तीन बड़े नेता एक ही जगह मौजूद हों और कोई हथियारबंद व्यक्ति अंदर घुस जाए, तो यह पूरी व्यवस्था की विफलता है। गृह विभाग और पुलिस प्रशासन अब इस बात की पड़ताल कर रहा है कि होटल में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया गया और क्या वहां मौजूद मेटल डिटेक्टर या अन्य जांच उपकरण काम कर रहे थे।
इस हमले की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी नाराजगी और चिंता जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘अल्लाह मेहरबान है। मेरे पिता बाल-बाल बच गए।’ उमर अब्दुल्ला ने सुरक्षा दस्ते की तारीफ तो की जिन्होंने समय रहते हमलावर को दबोच लिया, लेकिन उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि हमलावर ‘प्वाइंट ब्लैंक रेंज’ तक पहुंचने में कामयाब कैसे हुआ।
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पुलिस ने फिलहाल किसी भी आतंकी पहलू से इनकार किया है और इसे एक व्यक्ति की सनक या निजी दुश्मनी मानकर जांच कर रही है। यह घटना देश के हर नागरिक के लिए एक चेतावनी है कि सुरक्षा में एक छोटी सी लापरवाही भी कितनी घातक साबित हो सकती है।