आसमान में दिखी खून जैसी लाल रोशनी…यह बड़े खतरे का सिग्नल, वैज्ञानिकों ने और क्या-क्या कहा?
Ladakh Aurora Lights Science : लद्दाख में ऑरोरा लाइट्स देखी गई हैं। यह नजारा खूबसूरत था। मगर, पीछे की साइंस खतरनाक है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह बहुत बुरा संकेत है। इसके काफी नुकसान होते हैं।
- Written By: रंजन कुमार
लद्दाख के हानले गांव में दिख रही लाल लाइट्स।
Solar Storm India : अमूमन आसमान में तैरती रंगीन रोशनियां (ऑरोरा या नॉर्डिक लाइट्स) नॉर्वे, फिनलैंड या आइसलैंड जैसे बर्फीले देशों की पहचान मानी जाती हैं। मगर, पिछले दिनों लद्दाख के हानले गांव के ऊपर जो दिखा, उसने वैज्ञानिकों की धड़कनें बढ़ा दीं। 19 और 20 जनवरी की रात लद्दाख का नीला आसमान अचानक खून की तरह लाल हो गया। पहली नजर में यह जादुई लग सकता है, लेकिन विज्ञान कहता है कि यह खूबसूरती बड़े खतरे का सायरन है।
अमूमन ऑरोरा लाइट्स हरे रंग की होती और ध्रुवीय क्षेत्रों में दिखती हैं। लद्दाख जैसी कम ऊंचाई वाली जगह पर इनका दिखना अपने आप में एक चेतावनी है। लद्दाख से हमें इन रोशनियों का केवल ऊपरी हिस्सा दिखाई देता है, जो ऑक्सीजन एटम्स के साथ सूरज के पार्टिकल्स के टकराने से लाल रंग का नजर आता है।
इसके पीछे की वजह क्या?
इस नजारे के पीछे की असल वजह सूरज में हुआ एक भीषण धमाका है। 18 जनवरी को सूरज की सतह पर एक X-Class सोलर फ्लेयर फूटा। विज्ञान की भाषा में यह सबसे शक्तिशाली श्रेणी का विस्फोट होता है। इस धमाके के साथ ही सूरज ने कोरोनल मास इजेक्शन के रूप में गैस और मैग्नेटिक एनर्जी का एक विशाल गुबार धरती की ओर फेंका। जब यह गुबार धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकराया तो इसने G4 श्रेणी का जियोमैग्नेटिक तूफान पैदा कर दिया। इसी टकराव ने आसमान में वह डरावनी लाल रोशनी पैदा की।
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हम पर क्या असर होगा?
सूरज से उठने वाले ये तूफान सिर्फ रोशनी नहीं दिखाते, बल्कि आधुनिक जीवनशैली को तहस-नहस करने की ताकत रखते हैं। ये तूफान बिजली के ट्रांसफॉर्मर फूँक सकते हैं, जिससे कई शहरों में हफ्तों तक ब्लैकआउट हो सकता है। सोलर विंड्स के चलते सैटेलाइट्स अपने रास्ते से भटक सकते हैं। इससे आपका GPS, मोबाइल नेटवर्क और बैंकिंग ट्रांजैक्शन ठप हो सकते हैं। अंतरिक्ष में मौजूद एस्ट्रोनॉट्स के लिए यह रेडिएशन जानलेवा हो सकता है। भारत के आदित्य-L1 मिशन ने भी संकेत दिए हैं कि सूरज की ये हवाएं हमारे सैटेलाइट्स को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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भारत की तैयारी: आदित्य-L1 हमारा रक्षक
सूरज की इस बढ़ती सक्रियता को देखते हुए भारत का आदित्य-L1 (ISRO) मिशन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। इसमें लगे उपकरण ऐसे सौर तूफानों की जानकारी धरती पर पहुंचने से 1-2 दिन पहले ही दे सकते हैं। इससे हमें अपने सैटेलाइट्स को सेफ मोड में डालने और पावर ग्रिड्स को सुरक्षित करने का कीमती समय मिल जाता है।
