लालू परिवार। इमेज-सोशल मीडिया
Lalu Family Land For Jobs Scam: राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को नौकरी के बदले जमीन घोटाले में बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने लालू के खिलाफ आरोप तय किए हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद, उनकी पत्नी और पूर्व सीएम राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, हेमा यादव पर आरोप तय कर दिए हैं। लालू ने अपनी पत्नी और बच्चों के लिए अचल संपत्ति अर्जित की है। अन्य आरोपियों ने षडयंत्र में साथ दिया है। जमीन के बदले कई लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई। कोर्ट ने मामले में लालू समेत 40 से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने माना कि मामले में आगे सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार हैं। अब अगली प्रक्रिया के तहत ट्रायल शुरू होगा। आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश किए जाएंगे। 19 दिसंबर को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने लालू प्रसाद और अन्य आरोपियों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दायर मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि आरोप तय करने पर आदेश 9 जनवरी को सुबह 10:30 बजे सुनाया जाएगा।
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने मामले में आरोपी लोगों की स्थिति के बारे में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की थी। उस सत्यापन रिपोर्ट में कहा गया था कि उसकी चार्जशीट में नामजद 103 आरोपियों में से 5 लोगों की मौत हो चुकी है। जांच एजेंसी ने कथित घोटाले के सिलसिले में लालू प्रसाद, लालू की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।
आरोप है कि साल 2004 से 2009 के बीच जबलपुर स्थित इंडियन रेलवे के वेस्ट सेंट्रल जोन में ग्रुप-डी कैटेगरी में भर्तियां लालू के रेल मंत्री रहते की गईं। इसके बदले में भर्ती होने वाले लोगों ने लालू के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े तोहफे में दिए या हस्तांतरित कर दिए। सीबीआई का दावा है कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गईं। आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया है। उनका दावा है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
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एजेंसी का कहना है कि इन सौदों में बेनामी संपत्तियां भी शामिल थीं। जो आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आती हैं। राजनीतिक रूप से यह मामला काफी संवेदनशील है। लालू प्रसाद राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। उनके परिवार के सदस्य भी राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। ऐसे में इस मामले की सुनवाई न केवल कानूनी दृष्टि से, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम है।