सम्राट चौधरी और पप्पू यादव।
Samrat Chaudhary And Pappu Yadav News : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को सियासी पारा उस समय सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। कानून-व्यवस्था पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सम्राट चौधरी ने कुछ ऐसे मुहावरों और प्रतीकों का इस्तेमाल किया, जिसने बिहार की राजनीति में ‘जुबानी जंग’ को एक नया मोड़ दे दिया है। सम्राट चौधरी ने विपक्ष को ललकारते हुए कहा कि आज बिहार पुलिस का खौफ ऐसा है कि “हाथी भी डर के मारे बीमार होकर अस्पताल जाना चाहता है।”
राजनीतिक विश्लेषक सम्राट के इस ‘हाथी’ वाले बयान को सीधे तौर पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव से जोड़कर देख रहे हैं। डिप्टी सीएम ने किसी का नाम लिए बिना पुरानी घटना का जिक्र किया और कहा कि जो लोग कभी एयरपोर्ट पर उतरकर यह दावा करते थे कि बिहार पुलिस एक चींटी भी नहीं मार सकती, वही लोग पुलिसिया कार्रवाई के डर से दो घंटे के भीतर बीमार होने का नाटक करने लगते हैं। सम्राट ने स्पष्ट किया कि सुशासन की सरकार में अपराधी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे कानून के शिकंजे में आना ही होगा।
इस तंज पर पलटवार करते हुए सांसद पप्पू यादव ने मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए सम्राट चौधरी की तुलना बंदर से कर दी। पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि वह नाबालिग था और अब बंदर बन गया है, जिसके हाथ में बिहार है। उन्होंने सम्राट चौधरी की पगड़ी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि स्वाभिमान की पगड़ी को उन्होंने कमीशन बटोरने के लिए गमछा बना लिया है।
नाबालिग था अब बंदर बन गया है
इस बंदर के हाथ में बिहार है स्वाभिमान की पगड़ी उतार
कमीशन बटोरने के लिए
पगड़ी को गमछा बना लिया — Pappu Yadav (@pappuyadavjapl) February 20, 2026
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सम्राट चौधरी ने सदन में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को भी खुली चुनौती दी। नीट मामले में एक मंत्री के बेटे की संलिप्तता के आरोपों पर उन्होंने कहा कि यदि राबड़ी देवी नाम का खुलासा करती हैं, तो सरकार तुरंत कार्रवाई करेगी। उन्होंने राजद के शासनकाल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले सरकारें जेल से चलती थीं, लेकिन नीतीश कुमार के नेतृत्व में व्यवस्था बदल गई है। गृह मंत्री ने राज्य को पूरी तरह उग्रवाद मुक्त होने का दावा करते हुए बताया कि 143 उग्रवादियों की गिरफ्तारी के बाद अब बिहार में एक भी सक्रिय नक्सली नहीं बचा है। औद्योगिक सुरक्षा के लिए नई बटालियन और जेलों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग जैसे कड़े कदम पुलिस के इकबाल को और बुलंद करेंगे।