राहुल से करीबी बनी वेणुगोपाल की कमजोरी…कैसे सतीशन ने CM की रेस में हराया? 5 प्वाइंट्स में जानें Inside Story
VD Satheesan vs KC VenuGopal: कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लगभग 50 विधायकों के समर्थन के बावजूद वेणुगोपाल अपने पुराने प्रतिद्वंदी वीडी सतीशन से हार गए हैं। वीडी सतीशन उन पर कैसे भारी पड़ गए?
- Written By: अर्पित शुक्ला
केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन (Image- Social Media)
Kerala CM VD Satheesan: केरल सीएम पर 10 दिनों से जारी सस्पेंस से पर्दा हट गया है। आखिरकार केरल को नया मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है। लगभग 10 दिनों की माथापच्ची के बाद कांग्रेस पार्टी ने आज यानी गुरुवार को केरल के नए मुख्यमंत्री का ऐलान कर दिया है। वीडी सतीशन केरल के नए सीएम बनने जा रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी ने केसी वेणुगोपाल की जगह वीडी सतीशन पर ही भरोसा जताया है और कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लगभग 50 विधायकों के समर्थन के बावजूद वेणुगोपाल अपने पुराने प्रतिद्वंदी वीडी सतीशन से हार गए हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर केसी वेणुगोपाल कैसे हार गए और वीडी सतीशन उन पर कैसे भारी पड़ गए?
कैसे सतीशन ने मारी बाजी?
अब आपको बताते हैं कि राहुल गांधी ने अपने सबसे करीबी को ही बहुमत के बावजूद कैसे सीएम की कुर्सी से महरूम कर दिया? किस तरह सतीशन ने वेणुगोपाल को कम विधायकों के समर्थन के बावजूद हरा दिया, आइए पांच प्वाइंट्स में समझते हैं वीडी सतीशन ने वेणुगोपाल के जबड़े से सीएम की कुर्सी छीन ली?
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वीडी सतीशन बने केरलम के नए मुख्यमंत्री, कांग्रेस ने किया ऐलान, केसी वेणुगोपाल को लगा झटका
1. जनता का समर्थन….वीडी सतीशन को जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच जबरदस्त समर्थन हासिल था। कांग्रेस पार्टी के आंतरिक सर्वे में भी उनकी लोकप्रियता पर मुहर लगी थी। वहीं, विधायक उनके पक्ष में नहीं थे लेकिन सतीशन यह समझाने में कामयाब रहे कि वेणुगोपाल संगठन महासचिव रहते अपने समर्थक उम्मीदवारों को ज्यादा टिकट दिलवा सके थे। साथ ही उनको आर्थिक सहायता भी दिलवाई, जिससे वही जीत के आए हैं और इसलिए उनका समर्थन ज्यादा है। आलाकमान ने सतीशन की इस बात में दम पाया।
2. पार्टी में टूट का खतरा….वीडी सतीशन न तो वेणुगोपाल को सीएम बनाने के लिए सहमत थे और मा ही उनके नेतृत्व में काम करने के पक्ष में थे। इसका साफ मतलब है कि सतीशन वेणुगोपाल के मुख्यमंत्री चुने जाने पर उनके साथ काम करने को तैयार नहीं थे। सतीशन ने आलाकमान को स्पष्ट कहा था कि वो वेणुगोपाल के नाम को प्रपोज भी नहीं करेंगे। मतलब सतीशन किसी भी कीमत पर सीएम के पद से कम पर तैयार नहीं थे।
केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन, राहुल गांधी (Image- Social Media)
3. वेणुगोपाल की राहुल गांधी से करीबी….जब कोई हल नहीं निकलता दिखा तो राहुल गांधी ने मल्लिकार्जुन खरगे से बुधवार शाम मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच सभी पहलुओं पर चर्चा हुई। सतीशन के पक्ष में फैसला लेने से पहले वेणुगोपाल को मनाना आलाकमान के लिए जरूरी था। इसलिए ये जिम्मेदारी भी खरगे ने राहुल गांधी को ही सौंपी। राहुल गांधी ने वेणुगोपाल को गुरुवार सुबह अपने घर बुलाया और उनसे दो घंटे की लंबी बैठक की। राहुल गांधी ने उनसे कहा कि आप संगठन महासचिव बने रहिए, आगे अध्यक्ष का भी चुनाव है और आप उसके लिए भी हमारी पसंद बन सकते हैं। राहुल ने वेणुगोपाल से कहा कि आपके सामने बड़ा कैरियर है। फिलहाल पार्टी को एकजुट रखने के लिए आपको बलिदान देना पड़ेगा।
4. एंटनी की सलाह….चौथी सबसे बड़ी वजह राहुल गांधी की एंटनी से सलाह लेने का फैसला था। राहुल गांधी ने सतीशन बनाम चेन्निथला बनाम वेणुगोपाल की लड़ाई में फंसे पेच को सुलझाने के लिए सोनिया गांधी के खासरहे ए के एंटनी से बात की। राहुल गांधी से एंटनी ने कहा कि आपको जनसमर्थन के साथ जाना चाहिए और जाहिर है एंटनी ने संकेत दिया कि भले ही वेणुगोपाल को विधायकों का समर्थन है। लेकिन जमीन पर पिछले पांच साल लेफ्ट से लड़ने वाले सतीशन की छवि कार्यकर्ताओं और जनता में अच्छी है लिहाजा उनको ही प्रदेश की कमान देनी चाहिए।
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5. IUML और सतीशन की दोस्ती….आईयूएमएल (IUML) भी अंदरखाने सतीशन को समर्थन दे रहा था। केरल में IUML के बिना सरकार नहीं बन सकती थी और वेणुगोपाल के IUML से रिश्ते भी अच्छे नहीं थे। वीडी सतीशन को इस बात का भी फायदा मिला। केरल की वायनाड सीट भी गांधी परिवार के लिए कमजोर कड़ी साबित हुई। IUML ने वायनाड सीट पहले राहुल गांधी और फिर प्रियंका के लिए खाली की थी। IUML का इस सीट पर दबदबा है और उन्होंने किसी विधायक को ही मुख्यमंत्री बनाने का समर्थन किया था।
