शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (सोर्स- सोशल मीडिया)
Shankaracharya Avimukteswaranand: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार वह उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले में स्नान के लिए पहुंचे थे, लेकिन अपने शिष्यों के साथ कहासुनी के बाद उन्होंने धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भगदड़ मचाकर उनकी हत्या की साजिश रची गई थी।
पिछले साल भी वह महाकुंभ के दौरान काफी चर्चा और विवादों में रहे थे। उन्होंने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर सवाल उठाए हैं और दूसरे धार्मिक नेताओं ने भी उन्हें निशाना बनाया है। कई बार तो उनके शंकराचार्य होने के दावे पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसका वह अपने तर्कों से बचाव करते हैं।
कभी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को ‘कांग्रेस का एजेंट’ कहा जाता है तो कभी पीएम ‘मोदी विरोधी’ करार दिया जाता है। कभी वह खुद दावा करते हैं कि राहुल गांधी हिंदू नहीं हैं, कभी पीएम मोदी का भी समर्थन करते हुए नजर आते हैं। राजनैतिक मुद्दों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की तल्ख टिप्पणियां उन्हें विवादों में बनाए रखती हैं।
मौनी अमावस्या के मौके पर अविमुक्तेश्वरानंद प्रयागराज में संगम पर स्नान के लिए माघ मेला क्षेत्र पहुंचे। जब उनके समर्थक और शिष्य उनके जुलूस के साथ घाट की ओर बढ़ रहे थे, तो प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। इससे विवाद और हाथापाई हुई। आरोप लगे हैं कि पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ मारपीट की। उन्होंने कहा कि अगर संतों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाएगा तो वह पवित्र स्नान नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि स्नान की सूचना तीन दिन पहले ही दे दी गई थी।
किस चीज की परमिशन ?
मतलब गंगा स्नान परमिशन लेकर करना पड़ेगा?
गंगा पर उनकी रजिस्ट्री है ?
कौन सी कंपनी है कि उन्होंने गंगा पर रजिस्ट्री करवा ली है ?
उनके बाप से उन्हें मिली थी।
– शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद pic.twitter.com/ONTPewEwmd — अश्विनी सोनी (@Ramraajya) January 19, 2026
इस पूरे मसले पर प्रशासन ने जवाब देते हुए कहा कि शंकराचार्य के शिष्य एक साथ संगम नोज पर जाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि प्रशासन ने उनसे छोटे-छोटे समूहों में जाने को कहा था।आखिर में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद गुस्सा हो गए और बिना स्नान किए लौट गए। अब वह अन्न-जल त्यागकर धरने पर बैठ गए हैं। यही वजह है कि यह घटना तब से एक बड़ा मुद्दा बन गई है। विपक्षी दल खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में आ गए हैं।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ा पहला विवाद यह है कि वह वैध शंकराचार्य हैं या नहीं। सनातन परंपरा में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ हैं। ये चार मठ- बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम और पुरी हैं। इनमें से हर एक का एक अलग शंकराचार्य होता है।
अविमुक्तेश्वरानंद बद्रीनाथ के ज्योतिर्मठ से जुड़े हैं। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का 11 सितंबर, 2022 को निधन हो गया। उस समय वे इस मठ के शंकराचार्य थे। उनकी वसीयत के आधार पर स्वरूपानंद के निजी सचिव सुबोधानंद महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद को नया शंकराचार्य घोषित कर दिया।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (सोर्स- सोशल मीडिया)
हालांकि संन्यासी अखाड़ा और दूसरे अखाड़ों ने उन्हें शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया। उस समय अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कहा था कि अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति नियमों के खिलाफ है। इन विवादों के बावजूद वह इस पद पर बने हुए हैं और ज्योतिर्मठ का प्रतिनिधित्व करते हैं।
अपने गुरु स्वरूपानंद सरस्वती की तरह अविमुक्तेश्वरानंद भी बहुत राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। 2024 में जब राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह होना था, तो अविमुक्तेश्वरानंद ने इसका विरोध किया। उन्होंने इस बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी आलोचना की। उन्होंने कहा था कि एक अधूरे मंदिर में विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए की जा रही है।
वह खुद को ‘मोदी विरोधी’ कहलाना पसंद नहीं करते, लेकिन उन्हें अक्सर प्रधानमंत्री की आलोचना करते देखा जाता है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के दौरान जब कई घर और कथित मंदिर गिराए गए और उन घरों से मिली मूर्तियों की तस्वीरें सामने आईं तो अविमुक्तेश्वरानंद ने पीएम मोदी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस संबंध में ‘मंदिर बचाओ, विरासत बचाओ’ अभियान भी शुरू किया।
2015 में सपा सरकार के दौरान वाराणसी प्रशासन ने गणेश मूर्तियों को लक्ष्मी कुंड में विसर्जित करने की अनुमति दी थी। हालांकि, संत समुदाय उन्हें गंगा में विसर्जित करना चाहता था। हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए अविमुक्तेश्वरानंद और कई अन्य संतों ने विसर्जन किया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें अविमुक्तेश्वरानंद सहित दर्जनों संत घायल हो गए।
2015 जब मुख्यमंत्री अखिलेश
यादव के हुक्म पर प्रतिमा विसर्जन के समय
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके
सेवकों को मार-मार के अधमरा करवा दिया
था..क्योंकि मुस्लिमों को खुश करना था आज यही अविमुक्तेश्वरानंद अखिलेश की गोद मे बैठे है pic.twitter.com/zLhFOgXDfE — 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) January 13, 2024
लंबे गतिरोध के बाद पुलिस ने आखिरकार लाठीचार्ज करके प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया। इस लाठीचार्ज का वीडियो अक्सर अलग-अलग कहानियों के साथ शेयर किया जाता है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही पुलिस अविमुक्तेश्वरानंद को लाठी से मारती है, वह अपनी बांहें फैलाकर ‘मुझे मारो’ कहते हुए खड़े हो जाते हैं।
पिछले साल महाकुंभ के दौरान भी अविमुक्तेश्वरानंद महाकुंभ सुर्खियों में आए थे। महाकुंभ में स्नान के दौरान संगम पर भगदड़ में कई लोगों की जान चली गई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार को पूरी घटना की जानकारी थी, लेकिन उसने शाम तक इसे छिपाए रखा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे की भी मांग की थी। धर्म संसद के दौरान उन्होंने योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे की मांग करते हुए एक प्रस्ताव भी पास किया था।
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उस समय अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि ये लोग नाकाबिल हैं। इन्होंने संत समाज के साथ धोखा किया और भगदड़ को अफवाह बताकर खारिज कर दिया। हमने उन पर भरोसा किया और मृतकों के लिए एक पल का मौन रखे बिना शाही स्नान किया। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष को सीएम योगी आदित्यनाथ को उनके पद से हटा देना चाहिए।
Ans: मौनी अमावस्या के दिन संगम पर स्नान के दौरान प्रशासन द्वारा उनके शिष्यों को एक साथ संगम नोज पर जाने से रोके जाने पर विवाद हुआ। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उनके साथ बदसलूकी हुई और भगदड़ मचाकर उनकी हत्या की साजिश रची गई, जिसके विरोध में उन्होंने बिना स्नान किए लौटकर धरना और अन्न-जल त्याग शुरू कर दिया।
Ans: स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद उनकी वसीयत के आधार पर अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य घोषित किया गया। हालांकि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और कई अखाड़ों ने इस नियुक्ति को नियमों के खिलाफ बताते हुए उन्हें मान्यता देने से इनकार किया है, जिससे उनकी वैधता को लेकर विवाद बना हुआ है।
Ans: अविमुक्तेश्वरानंद राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकुंभ भगदड़ और संत समाज से जुड़े मुद्दों पर सरकार की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों पर सवाल उठाए और यहां तक कि महाकुंभ भगदड़ के बाद योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे की मांग भी की।