भारतीय सेना के टैंक पर ये जंजीरें क्यों लगी हैं?
Republic Day Parade at Rajpath: देश आज 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर कर्तव्य पथ पर भव्य परेड का आयोजन किया गया है, जहां दुनिया भारत की सैन्य ताकत को देख रही है। परेड में भारतीय सेना के अत्याधुनिक टैंक भी शामिल हैं। जब कर्तव्य पथ पर टैंक गुजरते हैं तो उनके पिछले हिस्से में जंजीरें या चेन लटकी दिखाई देती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि टैंकों में ये जंजीरें क्यों लगाई जाती हैं और इनका उद्देश्य क्या है?
दरअसल, ये जंजीरें टैंकों के लिए एक तरह का सुरक्षा कवच होती हैं, जो उन्हें दुश्मन के हमलों से बचाने में मदद करती हैं। यह एक सरल और किफायती तरीका माना जाता है। इन जंजीरों का इस्तेमाल रॉकेट लॉन्चर, एंटी-टैंक मिसाइलों और ड्रोन हमलों से टैंक की रक्षा के लिए किया जाता है। दुनिया की कई सेनाएं इस तकनीक को अपनाती हैं।
असल में टैंकों के सामने दो बड़े खतरे होते हैं। पहला आरपीजी यानी रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड और दूसरा ड्रोन हमला। जब कोई आरपीजी या ड्रोन टैंक की ओर बढ़ता है, तो वह पहले इन जंजीरों से टकराता है। जंजीरें इतनी भारी होती हैं कि वे बम या रॉकेट को पहले ही डेटोनेट कर देती हैं या उसके प्रभाव को काफी हद तक कम कर देती हैं। इससे टैंक को कम नुकसान पहुंचता है और अंदर मौजूद सैनिक सुरक्षित रहते हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इन जंजीरों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल देखने को मिला। यूक्रेनी सेना ने ड्रोन से हमले कर रूसी टैंकों को भारी नुकसान पहुंचाया था, जिसके चलते रूस को कई टैंक गंवाने पड़े। इसके बाद रूसी सेना ने भी अपने टैंकों पर ऐसी सुरक्षा जंजीरें लगानी शुरू कर दीं। इज़रायल की सेना भी अपने टैंकों में इस तरह की चेन का उपयोग करती है।
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भारतीय सेना ने भी समय के साथ बदलते युद्ध के तरीकों को देखते हुए टैंकों में जंजीरों का इस्तेमाल शुरू किया है। गणतंत्र दिवस पर आयोजित परेड में टी-90 भीष्म टैंक और मुख्य युद्धक टैंक (MBT) अर्जुन को शामिल किया गया है।