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गणतंत्र दिवस पर भारत-EU की महासंधि: ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से बदलेगी वैश्विक अर्थव्यवस्था, जानें कहां होगा फायदा

India-EU Trade Deal: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के नेताओं की मौजूदगी में 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहे जाने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर अंतिम मुहर लगने वाली है। जानें इससे क्या फायदे होंगे।

  • Written By: प्रतीक पांडेय
Updated On: Jan 26, 2026 | 02:05 PM

ऐतिहासिक व्यापार समझौते से पहले EU चीफ और पीएम मोदी, फोटो-सोशल मीडिया

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77th Republic Day Chief Guest: 77वें गणतंत्र दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर कर्तव्य पथ पर भारत की कूटनीतिक शक्ति का भव्य प्रदर्शन हुआ। इस वर्ष समारोह में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच उस ऐतिहासिक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का मंच है, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा।

गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत की प्रगति की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है, जिसका लाभ पूरी दुनिया को मिलता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस समारोह का मुख्य अतिथि बनने को “जिंदगी भर का सम्मान” बताया। वॉन डेर लेयेन के अनुसार, भारत और यूरोप ने रणनीतिक साझेदारी और खुलेपन का एक स्पष्ट विकल्प चुना है, जो विभाजित दुनिया के लिए उम्मीद की एक किरण है।

‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: 2 अरब लोगों का विशाल बाजार

सूत्रों के अनुसार, 27 जनवरी को होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में दोनों पक्ष बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत पूरी होने की आधिकारिक घोषणा कर सकते हैं। वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को “सभी समझौतों की जननी” करार दिया है, क्योंकि यह दो अरब लोगों के विशाल बाजार को जोड़ेगा। इस समझौते का उद्देश्य न केवल व्यापार बढ़ाना है, बल्कि वॉशिंगटन की टैरिफ-आधारित नीतियों और वैश्विक वाणिज्य में आ रही रुकावटों के बीच एक मजबूत विकल्प खड़ा करना है।

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लग्जरी कारें होंगी सस्ती: 40% तक घटेगा इंपोर्ट टैरिफ

इस ऐतिहासिक समझौते का सबसे बड़ा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत यूरोपीय संघ से आने वाली कारों पर आयात शुल्क (Import Tariff) को मौजूदा 110% से घटाकर 40% करने पर सहमत हो गया है। यह रियायत उन कारों पर लागू होगी जिनकी आयात कीमत लगभग 16.3 लाख रुपये ($17,739) से अधिक है। उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में यह टैरिफ और घटकर महज 10% तक रह जाएगा, जिससे मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी कारों की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है।

द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक साझेदारी

यूरोपीय संघ वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार:

• वित्त वर्ष 2023-24 में द्विपक्षीय सामानों का व्यापार 135 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था।
• वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 136 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 76 अरब डॉलर और आयात 60 अरब डॉलर शामिल है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों शीर्ष नेताओं का स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी चर्चा द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करेगी। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही वैश्विक चुनौतियों और चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव के बीच अपनी व्यापारिक सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं।

यह भी पढ़ें: Global Celebration: दुनिया भर में गूंजा भारत का गौरव, भारतीय दूतावासों में मनाया गया 77वां गणतंत्र दिवस

दशकों का इंतजार खत्म: 2007 से 2026 तक का सफर

भारत और EU के बीच इस व्यापार समझौते की प्रक्रिया बेहद लंबी रही है। पहली बार 2007 में बातचीत शुरू हुई थी, लेकिन मतभेदों के चलते 2013 में इसे रोक दिया गया था। करीब एक दशक के अंतराल के बाद, जून 2022 में इस प्रक्रिया को फिर से शुरू किया गया, जो अब 2026 में अपने निर्णायक मुकाम पर पहुंचती दिख रही है। यह समझौता न केवल आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करने की दिशा में भी एक बड़ी उपलब्धि साबित होगा।

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Published On: Jan 26, 2026 | 02:05 PM

Topics:  

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