Explainer: इन 3 वजहों से आसमान से बरस रही है आग, समझिए आखिर कब और कैसे मिलेगी इस जानलेवा गर्मी से राहत
What is Heat Dome: भारत में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर लगातार बढ़ रहा है। कई राज्यों में तापमान 47 डिग्री के पार पहुंच चुका है, जबकि मौसम वैज्ञानिकों ने कमजोर मानसून और एल नीनो की चेतावनी दी है।
- Written By: अक्षय साहू
भारत में क्यों पड़ रही इतनी गर्मी (AI जनरेटेड फोटो)
Why India Heatwave 2026 Record: भारत में इस समय भीषण गर्मी का कहर जारी है। हालात ये हैं कि मई का महीना खत्म होने से पहले पारा 50 डिग्री सेल्सियस को छूने के करीब है और तापमान ने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दुनिया के 50 सबसे गर्म शहरों में अधिकतर भारत के हैं। 22 मई 2026 को उत्तर प्रदेश का बांदा न सिर्फ भारत बल्कि पुरी दुनिया का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस रहा।
बांदा के अलावा देश के कई और राज्यों का भी यही हाल रहा। मध्य प्रदेश के खजुराहो में 47.4°C और महाराष्ट्र के वर्धा में 47.1°C तापमान रिकॉर्ड किया गया। भारत के पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश वो राज्य है जो इस समय गर्मी और हीटवेव की मार झेल रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। सरकार लोगों से अपील कर रही हैं कि अगर जरूरी न हो तो घरों में ही रहे और दोपहर के वक्त घरों में ही रहें। आइए आपको बताते हैं कि भारत में इतनी गर्मी क्यों हो रही है? हीटवेव क्या होता है? और कब तक लोगों को इससे राहत मिल सकती है?
हीटवेव क्या होता है?
क्या होता है हीटवेव और सीवियर हीटवेव में अंतर (AI जनरेटेड फोटो)
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भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, केवल तापमान बढ़ने को ही हीटवेव नहीं कहा जाता। इसके लिए कुछ तय मानक होते हैं। जैसे अगर किसी इलाके का तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाए और यह स्थिति लगातार दो दिनों तक बनी रहे, तो उसे हीटवेव माना जाता है। जबकि तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री या उससे ज्यादा बढ़ जाए, तो उसे गंभीर हीटवेव या सीवियर हीटवेव कहा जाता है। इस समय उत्तर और मध्य भारत के कई इलाकों में तापमान 42°C से 47°C तक पहुंच चुका है, जो सामान्य से काफी ज्यादा है।
भारत में क्यों पड़ रही है इतनी गर्मी?
इस साल की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के पीछे कई वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण हैं।
पहला कारण: भारत की भौगोलिक स्थिति है। भारत कर्क रेखा के पास स्थित है। मई और जून के दौरान सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है। यही वजह है कि हर साल इन महीनों में गर्मी ज्यादा होती है, लेकिन इस बार हालात पहले से कहीं ज्यादा गंभीर हैं।
दूसरा कारण: जेट स्ट्रीम और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस में बदलाव। जेट स्ट्रीम जमीन से लगभग 8 से 15 किलोमीटर ऊपर बहने वाली तेज हवाओं को कहा जाता है। जानकारी के मुताबिक, इस साल अप्रैल में जेट स्ट्रीम ने अपना रास्ता बदल लिया और यह सामान्य सीधी दिशा में बहने के बजाय “U” आकार में मुड़ गया। इसके कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तर और पश्चिम भारत की ओर पहुंच गया। शुरुआत में इससे कई राज्यों में बारिश और ओले गिरे। लेकिन बाद में जब यह सिस्टम आगे बढ़ गया, तो आसमान पूरी तरह साफ हो गया और तापमान तेजी से बढ़ने लगा।
हीट डोम भीषण गर्मी के लिए जिम्मेदार (AI जनरेटेड फोटो)
तीसरा कारण: हीट डोम। लंबे समय तक लगातार गर्मी रहने से जमीन से लगभग 5 किलोमीटर ऊपर उच्च दबाव का एक क्षेत्र बन जाता है। इसे हीट डोम कहा जाता है। यह एक ढक्कन की तरह काम करता है, जो गर्म हवा को बाहर निकलने नहीं देता। सामान्य लू के समय कभी-कभी बारिश या तेज हवाओं से राहत मिल जाती है, लेकिन हीट डोम के कारण ऐसा नहीं हो पाता। यह गर्म हवा को जमीन के पास ही कैद कर देता है और तापमान लगातार बढ़ता रहता है। जब तक कोई मजबूत मानसूनी हवा या नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस नहीं आता, तब तक यह स्थिति बनी रह सकती है।
लोगों को कब मिलेगी गर्मी से राहत?
सीवियर हीटवेव की मार झेल रहे लोगों को अब मानसून का इतजार है। मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून 26 मई 2026 तक केरल पहुंच सकता है। 23 मई से केरल, कर्नाटक और गुजरात के कुछ हिस्सों में प्री-मानसून बारिश शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों जैसे असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर में भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। पश्चिम बंगाल, सिक्किम, बिहार और ओडिशा में भी तूफान और बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
भारत के 10 राज्यों में हीटवेव का अलर्ट (AI जनरेटेड फोटो)
हालांकि, उत्तर भारत के लोगों को राहत के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में मानसून जून के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक पहुंचने की संभावना है। तब तक यहां सामान्य से ज्यादा लू वाले दिन बने रह सकते हैं।
कमजोर हो सकता है मानसून
मौसम वैज्ञानिकों ने गर्मी के साथ-साथ मानसून को लेकर भी चिंताएं जताई हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस साल मानसून पहले की तुलना में कमजोर हो सकता है और सामान्य से 8 प्रतिशत कम बारिश होने की आशंका है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण एल नीनो है। एल नीनो एक ऐसी स्थिति है जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे दुनिया भर के मौसम पर असर पड़ता है और भारत की मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं।
कमजोर हो सकता है मानसून (AI जनरेटेड फोटो)
अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2026 के बीच एल नीनो बनने की संभावना 70 प्रतिशत से ज्यादा है। वैज्ञानिकों को डर है कि इस बार “सुपर एल नीनो” भी बन सकता है। जब समुद्र का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ जाता है, तब सुपर एल नीनो की स्थिति पैदा होती है। इससे पहले 2015-16 में सुपर एल नीनो के कारण भारत में लगभग 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। उस समय कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बन गई थी और किसानों को भारी नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की स्थिति उससे भी ज्यादा गंभीर हो सकती है।
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भारत के लिए खतरे की घंटी
2026 की गर्मी केवल एक सामान्य मौसमी बदलाव नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन और गंभीर वायुमंडलीय बदलावों का संकेत है। हीट डोम, लगातार बढ़ता तापमान और सुपर एल नीनो जैसी घटनाएं भविष्य के लिए चिंता पैदा कर रही हैं। आने वाले हफ्तों में उत्तर भारत को और भी ज्यादा गर्मी झेलनी पड़ सकती है। ऐसे समय में लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
Frequently Asked Questions
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Que: हीटवेव क्या होती है?
Ans: जब किसी क्षेत्र का तापमान सामान्य से 4.5°C ज्यादा लगातार दो दिन रहे तो उसे हीटवेव कहते हैं। तापमान 6.4°C या अधिक बढ़ने पर इसे सीवियर हीटवेव माना जाता है।
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Que: भारत में इस बार इतनी ज्यादा गर्मी क्यों पड़ रही है?
Ans: भारत की भौगोलिक स्थिति, जेट स्ट्रीम में बदलाव, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और हीट डोम जैसे कारणों से तापमान तेजी से बढ़ा है। जलवायु परिवर्तन भी बड़ी वजह माना जा रहा है।
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Que: भारत में इस साल मानसून कब आएगा?
Ans: दक्षिण भारत में प्री-मानसून बारिश से जल्द राहत मिल सकती है, लेकिन दिल्ली, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में मानसून जून के दूसरे-तीसरे सप्ताह तक पहुंचने की संभावना है।
