आखिर कौन होगा सहारा ग्रुप के 2.59 लाख करोड़ रुपए के साम्राज्य का अगला वारिस
- Written By: विजय कुमार तिवारी
लखनऊ : कहा जाता है कि अगर छोटे से बड़ा बनना हो और बड़े सपने देखकर उसको पूरा करने की नसीहत अगर किसी से लेनी हो तो उसमें सहारा परिवार के मुखिया सुब्रत रॉय सहारा (Subrata Roy Sahara) के जीवन ले प्रेरणा ली जा सकती है, लेकिन लंबे चौड़े कारोबार को फैलाने में उनकी कंपनियों में कुछ ऐसा लोचा हो गया, जिससे न सिर्फ कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पड़े, बल्कि जेल तक जाना पड़ा। कहा जाता है कि सहारा समूह का 22 हजार करोड़ रुपये अभी भी सहारा-सेबी खाते में जमा है। सेबी के तमाम प्रयासों के बावजूद निवेशकों को ये पैसा नहीं मिल पा रहा है। वहीं इनकी मौत के बाद इतने लंबे चौड़े कारोबार को संभालने वाले उत्तराधिकारियों के बारे में चर्चा होने लगी है।
सहाराश्री का एक लंबी बीमारी के बाद मुंबई में मंगलवार को निधन हो गया। 2 हजार की छोटी पूंजी से अरबों-खरबों का कारोबार खड़ा करने वाले सहाराश्री के पास अंतिम समय में कोई अपना नहीं था। वह पिछले दो महीने से इलाज के लिए मुंबई के अस्पताल में भर्ती थे। पत्नी और दोनों बेटे फिलहाल विदेश में हैं और सभी लोगों ने वहीं की नागरिकता ले रखी है। ऐसे में सवाल उठता है कि उनकी इस संपत्ति का वारिस (sahara family property) कौन होगा और इन सब कारोबारों को अब कौन संभालेगा।
अंतिम संस्कार में नहीं आए बेटे
हालांकि उनके निधन की खबर सुनने के बाद उनकी पत्नी स्वप्ना रॉय (Subrata Roy’s wife Swapna Roy) और बेटे सुशांतो रॉय और सीमांतो रॉय (Subrata Roy’s sons Sushanto Roy and Seemanto Roy) में से केवल उनकी पत्नी स्वप्ना रॉय ही भारत आयीं हैं। उनके साथ उनके पोते-पोती भी लखनऊ में देखे गए हैं, जो उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मेसेडोनिया से लखनऊ आ गए हैं। लेकिन उनके दोनों बेटे बेटे सुशांतो रॉय और सीमांतो रॉय अभी मेसेडोनिया में ही रहते हैं क्योंकि उन्होंने वहां के नागरिकता ले रखी है। यहां पर दर्ज मुकदमों में कार्रवाई के खतरे की वजह से यहां नहीं आ रहे हैं।
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इस बात की संभावना
ऐसी भी चर्चा है कि सुब्रत रॉय सहारा के दोनों ही बेटे सुशांतो रॉय और सीमांतो रॉय सहारा के कारोबार के साथ काफी समय से जुड़े हुए हैं। उनके करीबियों के द्वारा ऐसा दावा किया जा रहा है कि सहाराश्री के निधन के बाद उनका कारोबार उनके दोनों बेटे ही संभालेंगे। अगर कोई कानूनी अड़चन आयी तो उनकी पत्नी स्वप्ना रॉय भी इसके लिए तैयार हैं। हालांकि सुब्रत रॉय सहारा ने आधिकारिक तौर पर किसी को अपना कोई उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। वहीं सहारा परिवार की ओर से भी उत्तराधिकारी के बारे में किसी भी तरह की कोई जानकारी साझा नहीं की गयी है। ऐसे में इस बात की संभावना है कि विदेश में रहने वाले दोनों बेटे वहीं से सहारा के कारोबार को संभालेंगे और ओपी श्रीवास्तव यहां पर उनके फरमानों को लागू कराने की कोशिश करेंगे।
सुब्रत रॉय
ओपी श्रीवास्तव भी हैं खासमखास
वैसे अगर देखा जाय तो सहारा प्रमुख के निधन के बाद उनकी पत्नी स्पप्ना राय उनकी विरासत को संभालने के मूड में दिख रही हैं, जो पहले से ही इन कामों को देख रही हैं, जब से सहारा प्रमुख कोर्ट व जेल के चक्कर काट रहे थे। हालांकि बीते 7 नवंबर को सुब्रत रॉय सहारा की ओर से जारी एक पत्र में सहारा समूह में उप प्रबंध कार्यकर्ता ओपी श्रीवास्तव को अधिकतर प्रशासनिक कार्यों से जुड़े फैसले लेने की जिम्मेदारी सौंप दी थी, क्योंकि ओपी श्रीवास्तव को वह अपना सबसे भरोसेमंद मानते थे। ओपी श्रीवास्तव ने सहाराश्री पर तमाम मुसीबतें आने के बावजूद कभी साथ नहीं छोड़ा।
आखिर कितनी है संपत्ति
वैसे अगर रिकॉर्ड के हिसाब से देखा जाय को सहाराश्री की पूरी सम्पत्ति का ब्यौरा कहीं नहीं मिल पाता है। लोग अस बारे में केवल तरह तरह के अनुमान लगाते हैं। कहा जाता है कि उनके पास 2,59,900 करोड़ से अधिक की निजी संपत्ति है। उनके पास करीब 30,970 एकड़ का भारी भरकम लैंडबैंक रहा है। देश के कई इलाकों में 5000 से अधिक ऑफिस यूनिट्स भी हैं। इसके अलावा उनके पास लखनऊ का सहारा शहर, सहारा के ऑफिस, सहारा मॉल जैसी संपत्तियां है।
कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक सहारा ग्रुप के पास 9 करोड़ निवेशक बताए जाते हैं। सहारा ग्रुप की वेबसाइट का दावा है कि कंपनी की वर्तमान नेटवर्थ 2.59 लाख करोड़ रुपए है। देशभर के अलग-अलग इलाके में उनके पास अरबों रुपये की जमीन, होटल भी हैं। सहारा के कारोबारों के बारे में कहा जाता है कि कि उन्होंने रियल एस्टेट, फाइनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट के साथ-साथ हेल्थ केयर, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपना सफलतापूर्वक हाथ आजमाया था।
क्रिकेट से लेकर सिनेमा में भी अच्छा खासा निवेश किया। सहारा टीम इंडिया की स्पॉन्सर भी रह चुके हैं। आईपीएल और फार्मूला वन टीमों के मालिक के रूप में भी हाथ आजमाए। साथ ही सहारा की एयरलाइंस में भी उन्होंने हाथ आजमाया, लेकिन यह कारोबार लंबा नहीं चला। एंबी वैली और लग्जरी हाउसिंग में कंपनी की अच्छी खासी दिलचस्पी थी, जिसका नमूना लोग देख चुके हैं।
