हाथरस में मची भगदड़ ने छोड़े कई सवाल; 116 मौतों का जिम्मेदार कौन, प्रशासन या बाबा?
हाथरस में सत्संग की अनुमति दी गई तो उस लिहाज से तैयारियां या सुरक्षा के बंदोबस्त क्यों नहीं किए गए। आखिर क्यों सिर्फ आयोजकों या बाबा के आश्वासन के भरोसे हजारों लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया गया? सैकड़ों लोगों की मौत का असली जिम्मेदार कौन है? और किसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए?
- Written By: अभिषेक सिंह
हाथरस भगदड़ के बाद ट्रामा सेंटर के बाहर का दृश्य (सोर्स-पीटीआई)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के हाथरस में सत्संग के दौरान मची भगदड़ प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यूपी की अफसरशाही समेत पूरा सरकारी अमले में हड़कंप मच गया है। हादसे में मरने वालों का आंकड़ा 116 पहुंच चुका है। हाथरस की इस घटना ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगाए हैं। हादसे को लेकर अनगिनत ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब प्रशासन को देने होंगे!
हाथरस भगदड़ को लेकर उठ रहे सवालों में सबसे अव्वल यह है कि सत्संग की अनुमति देने से पहले 2 साल पहले की घटना का संज्ञान क्यों नहीं लिया गया? अगर संज्ञान लिया गया और उसके बाद अनुमति दी गई तो उस लिहाज से तैयारियां या सुरक्षा के बंदोबस्त क्यों नहीं किए गए। आखिर क्यों सिर्फ आयोजकों या बाबा के आश्वासन के भरोसे हजारों लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया गया? सैकड़ों लोगों की मौत का असली जिम्मेदार कौन है? और किसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए?
दो साल पहले क्या हुआ था?
हाथरस में जिस कथावाचक नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के सत्संग के दौरान भगदड़ मची, यह हादसा हुआ और सैकड़ों लोग काल का निवाला बन गए उसके पहले एक कार्यक्रम में भी अप्रत्याशित भीड़ इकट्ठा हो चुकी है। समय था मई 2022 यूपी के ही फर्रूखाबाद में नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा का एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम के लिए प्रशासन से अनुमति ली गई। प्रशासन ने सत्संग के में 50 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी। लेकिन इस सत्संग में 50 हजार लोग पहुंच गए।
सम्बंधित ख़बरें
Aaj Ka Rashifal 25 June 2026: किस राशि को होगा धन लाभ और किसे बरतनी होगी सावधानी, पढ़ें आज का भविष्यफल
Anna Hazare RTI Protest: मुंबई में हजारे-सूचना आयुक्त की बातचीत फेल, अन्ना अनशन को लेकर अटल
आगरा में नाज़िया इलाही के खिलाफ कार्रवाई की मांग, सशक्त पीली सेना ने डीसीपी को सौंपा ज्ञापन
Agra Metro: मनकामेश्वर से आईएसबीटी तक मेट्रो सेवा को लेकर तैयारियां पूरी, ताजमहल से बस अड्डे तक सफर होगा आसान
यह भी पढें: कैसे नारायण साकार हरि बन गए सूरजपाल, आखिर क्या है ‘भोले बाबा’ की कहानी?
कोरोना की दूसरी लहर के बाद और तीसरी लहर की आमद की आशंकाओं के बीच फर्रूखाबाद में हुए बाबा के सत्संग में 50 हजार लोगों के पहुंचने के बाद शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा गई। लोग घंटों जाम से जूझते रहे। हालांकि उस दौरान गनीमत यह रही कि हाथरस जैसा कुछ नहीं हुआ। खैर, इसके अगले दिन प्रशासन ने आयोजकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन मामला ज्यों का त्यों रह गया।
‘हम देख लेंगे’ के भरोसे छोड़ दी भीड़
इस बार भी कहा जा रहा है जिला प्रशासन से कार्यक्रम की अनुमति ली गई थी। लेकिन अनुमति के लिए दिए गए आवेदन में श्रृद्धालुओं की संख्या का जिक्र नहीं था। उसमें अनगिनत अनुयायियों के शामिल होने की अनुमति मांगी गई थी। प्रशासन ने अनगिनत को 80 हजार के आंकड़े में बदलते हुए अनुमति दे दी। लेकिन स्थानीय लोगों की मानें तो सत्संग में 1 लाख से भी ज्यादा लोग शामिल हो गए। यहां सुरक्षा व्यवस्था के लिए बाहर 40 पुलिसकर्मी तैनात किए गए और अंदर की सुरक्षा व्यवस्था आयोजकों और बाबा के आश्वासन ‘हम देख लेंगे’ के भरोसे छोड़ दी गई।
116 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन?
सत्संग के बाद बाबा के दर्शन और आशीर्वाद के लिए भीड़ बाबा की तरफ बढ़ी। जिसके बाद ‘हम देख लेंगे’ का आश्वासन फुस्स हो गया। भगदड़ मची और नतीजा यह हुआ कि 116 लोग मौत का निवाला बन गए। संख्या अभी और भी बढ़ सकती है। वहीं कई लोग मौत को मात देने के लिए अस्पताल में संघर्ष कर रहे हैं। इसके बाद जो सवाल उठे प्रशासन से उनके जवाब की उम्मीद 116 लोगों के परिवारों के साथ-साथ पूरे देश की जनता को है? उम्मीद है प्रशासन उम्मीदें नहीं तोड़ेगा!
