पेपर लीक के खिलाफ खुद आंदोलन कर चुके हैं धर्मेंद्र प्रधान, लाठीचार्ज में हुए थे घायल; क्या है वो 1997 की घटना?
Dharmendra Pradhan Against Paper Leak: धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे को लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। लेकिन, एक ऐसा समय था, जब वह खुद पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। क्या है वो पूरी घटना?
- Written By: मनोज आर्या
जब पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे धर्मेंद्र प्रधान, (AI जेनरेटेड इमेज)
Dharmendra Pradhan 1997 Protest Against Paper Leak: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों की स्पष्ट मांग है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से कम कुछ भी नहीं चाहिए। इसके अलावा सीजेपी के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी अन्य मांगों को भी उनके समक्ष रखा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही उग्र प्रदर्शन के बीच एक ऐसी जानकारी सामने आ रही है, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खिंचा है।
दरअसल, एक समय धर्मेंद्र प्रधान पेपर लीक को लेकर खुद सड़कों पर उतर गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने इस आंदोलन का नेतृत्व किया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की लाठीचार्ज में वे गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। आखिर क्या वो घटना क्या थी? आइए सबकुछ विस्तार से जानते हैं।
छात्र राजनीति से उभरे प्रधान
शिक्षा मंत्रालय के नाम बदलने के कुछ महीनों बाद ही धर्मेंद्र प्रधान के रूप में देश को एक ऐसा शिक्षा मंत्री मिला, जो छात्र राजनीति के दम पर अपने लिए मुख्यधारा की राजनीति में जमीन तैयार किया था। धर्मेंद्र प्रधान न सिर्फ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) का हिस्सा थे, बल्कि उन्होंने नवंबर 1994 से 1997 के बीच दो बार संगठन के नेशनल सेक्रेटरी के तौर पर भी काम किया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में उनके साथ काम करने वाले उनके साथियों ने बताया कि वे कैसे संगठन में सक्रिय और मजबूत थे। विरोध प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और हमेशा दूसरों की मदद करते थे।
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक कार्यक्रम के दौरान धर्मेंद्र प्रधान, (सोर्स- सोशल मीडिया)
क्या है वो 1997 की घटना?
धर्मेंद्र प्रधान के साथियों ने एक घटना को याद करते हुए बताया कि 1997 में ओडिशा में एक पेपर-लीक हुआ था, उस समय प्रधान एबीवीपी के नेशनल सेक्रेटरी थे और भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले थे। उस दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सेक्रेटेरिएट के सामने ओडिशा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस विरोध प्रदर्शन में करीब 1,500 छात्र शामिल हुए थे। यह प्रदर्शन बेहद ही शांतिपूर्ण था, बावजूद इसके पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दी। इस घटना में धर्मेंद्र प्रधान को बहुत बुरी तरह पीटा गया था। उनके शरीर में कुछ फ्रैक्चर भी आए थे।
1997 में पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन में पुलिस की लाठीचार्ज में घायल धर्मेंद्र प्रधान, (सोर्स- सोशल मीडिया)
उनके साथियों ने कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं थी। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी में चुनाव अक्सर हिंसक हो जाते थे, क्योंकि इसमें सत्तारुढ़ पार्टी शामिल होती थी। ऐसी ही एक घटना के दौरान, यह जानते हुए कि प्रधान यूनिवर्सिटी चुनाव जीतने वाले हैं, जनता दल के गुंडों ने उन्हें बुरी तरह पीटा था। वह आज जिंदा हैं, यह उनकी किस्मत है।
संगठन में धर्मेंद्र प्रधान का योगदान
ओडिशा भाजपा के प्रवक्ता सुदीप्ता कुमार रे ने कुछ दशक पहले के समय को याद करते हुए कहा, कॉलेज में मैं धर्मेंद्र प्रधान का सीनियर था। हम दोनों पहले ABVP और फिर बीजेपी में साथ काम किया। उन्होंने आगे कहा कि मैं उनसे पहली बार 1985 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक ट्रेनिंग कैंप में मिला था। वे 1983 में संगठन में शामिल हुए थे। तब से हमदोनों अच्छे दोस्त हैं। वह बताते हैं कि कैसे प्रधान ने कड़ी मेहनत की और हर मीटिंग से पहले काफी ‘होमवर्क’ किया और ओडिशा में संगठन को पॉपुलर बनाने के लिए प्लान तैयार किए।
छात्र जीवन के दौरान धर्मेंद्र प्रधान, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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‘तीन कलम रखते थे धर्मेंद्र प्रधान’
सुदीप्ता कुमार रे ने बताया कि धर्मेंद्र प्रधान हमेशा अपने साथ तीन कलम (एक लाल, एक नीला और एक काला) रखते थे। वह उनका इस्तेमाल डॉक्यूमेंट्स के खास हिस्सों पर निशान लगाने और उनका विश्लेषण करने के लिए करते थे। वह अपने काम को काफी गंभीरता से लेते थे। उन्हें याद है कि कैसे प्रधान ने कॉलेज के पहले साल में ही एक्टिविज्म शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि जहां अधिकांश लोग 18 साल की उम्र में पहली बार वोट डालते हैं, वहीं धर्मेंद्र प्रधान ने तब तक चुनाव लड़ना शुरू कर दिया था।
