वक्फ मामले पर सरकार को मिली राहत, रजिस्ट्रेशन की तारीख बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उमीद (UMEED) पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सुप्रीम कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Supreme Court on Waqf Act: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से जुड़ी एक अहम कानूनी लड़ाई में बड़ी जीत दिलाई। अदालत ने उमीद (UMEED) पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग को ठुकरा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन पक्षों को इस प्रक्रिया के बारे में कोई आपत्ति या शिकायत है, वे अपने मुद्दे संबंधित वक्फ ट्रिब्यूनल के सामने रख सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के लिए कानून के तहत पहले से ही उचित मंच उपलब्ध है, और इसलिए तारीख बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है।
यह निर्णय वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो सरकार की कोशिशों को मजबूती प्रदान करता है। अब यह उम्मीद की जा रही है कि इस फैसले से वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन में तेजी आएगी और इसमें पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं की तरफ से दलील दी गई कि मुद्दा केवल उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके डिजिटलीकरण से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील ने कहा कि पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में वास्तविक कठिनाई का सामना करने वाला कोई भी आवेदक ट्रिब्यूनल से समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध कर सकता है।
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कोर्ट ने क्या कहा?
सर्वोच्च अदालत ने याचिका पर कहा कि यदि समय सीमा (पोर्टल में) रुक जाती है, तो आपको ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यदि ट्रिब्यूनल आपको इजाजत देता है, तो आपके छह महीने गिने जाएंगे और आपके आवेदन पर विचार किया जाएगा। आपको अनुमति की आवश्यकता नहीं है। यदि कोई कठिनाई आती है, तो आप हमेशा हमारे पास आवेदन कर सकते हैं।
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क्या है वक्फ?
इस्लाम में ‘वक्फ’ धार्मिक या धर्मार्थ इस्तेमाल के लिए संपत्तियों को नामित करता है। इसका प्रबंधन ‘मुतवल्ली’ द्वारा किया जाता है, जो इन संपत्तियों की देखरेख और प्रबंधन करते हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वक्फ बोर्ड भारत में नौ लाख चालीस हजार एकड़ में फैली आठ लाख सत्तर हजार संपत्तियों की देखरेख करते हैं, जिनकी कीमत 1.20 लाख करोड़ रुपये है।
