

Uma Bharti Comeback in Politics: मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की फायरब्रांड नेता उमा भारती ने एक बार फिर राजनीति में अपनी सक्रिय वापसी के संकेत दिए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि वह अभी 65 साल की भी नहीं हुई हैं और चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उमा भारती ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी राजनीतिक दल रिटायरमेंट की उम्र तो तय कर सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति के योगदान देने की क्षमता को उम्र के दायरे में नहीं बांधा जा सकता।
उमा भारती ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि राजनीति योगदान का एक मंच है और उनके पास जनता की ताकत है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें लगेगा कि वह तैयार हैं, तो चुनाव जरूर लड़ेंगी। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश की राजनीति में उनके भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। उनके इस बयान ने एक बार फिर सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है और उनके अगले कदम का इंतजार किया जा रहा है।
अपनी बात को और मजबूती से रखते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी ने 65 साल की उम्र में लोकसभा का चुनाव लड़ा था। मैं तो अगले साल 65 की होऊंगी।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह अभी चुनाव लड़ने की कोशिश करती हैं तो कुछ रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। उमा भारती ने अपनी एक कमजोरी का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपनी प्रतिबद्धताओं को लेकर बहुत ईमानदार हैं। अगर वह संसदीय सीट से चुनाव लड़ती हैं, तो उन्हें अपना पूरा समय और ईमानदारी वहां के लोगों को देना होगा, और अगर किसी को कोई परेशानी होती है तो उन्हें इसका दुख होगा।
विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों पर भी उमा भारती ने जमकर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि चुनाव, चुनाव आयोग में नहीं बल्कि जनता का दिल जीतकर जीते जाते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं राहुल गांधी से कहूंगी कि पहले लोगों का दिल जीतना सीखें।' उमा भारती ने आगे कहा कि आप सशस्त्र बलों का अपमान करते हैं, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को वापस लाने की बात करते हैं और राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण मिलने पर भी नहीं जाते। आपकी पार्टी चुनाव जीतने में असमर्थ है क्योंकि आप राष्ट्रीय गौरव से जुड़ी हर चीज की अवहेलना करते हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि आपातकाल लगाने के बाद वह भी चुनाव हार गई थीं, क्योंकि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत मतदाताओं के पास होती है।