होर्मुज की नाकाबंदी से भारत में LPG-तेल आपूर्ति का संकट (सोर्स- सोशल मीडिया)
Strait of Hormuz Blockade Impact on India: इस्लामाबाद शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी का आदेश देकर पूरी दुनिया में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है। इस आदेश के तहत इस मार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों को रोकने की बात कही गई है। यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि पहले ट्रंप ईरान द्वारा होर्मुज को अवरुद्ध करने का विरोध करते रहे हैं, जबकि अब वे खुद उसी तरह का कदम उठा रहे हैं।
ट्रंप के निर्देश के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों से जुड़े सभी समुद्री यातायात पर नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करेगी। इसमें फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बंदरगाह भी शामिल हैं। सेंटकॉम ने स्पष्ट किया है कि इस नाकाबंदी का असर सभी देशों पर पड़ेगा, और रिपोर्ट्स के अनुसार इसकी शुरुआत भी हो चुकी है।
जापानी निवेश बैंक नोमुरा की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस बढ़ते तनाव का सबसे अधिक प्रभाव एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। चीन को छोड़कर जापान, थाईलैंड और फिलीपींस जैसे देश विशेष रूप से जोखिम में हैं, क्योंकि वे अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करते हैं।
होर्मुज संकट को लेकर भारत की स्थिति भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, क्योंकि देश अपनी लगभग 60% एलएनजी आपूर्ति इसी क्षेत्र से प्राप्त करता है। हालांकि ईरान ने भारत को भरोसा दिलाया है कि तेल की सप्लाई बाधित नहीं होगी, लेकिन क्या अमेरिका जिसने होर्मुज की नाकेबंदी ही ईरान को आर्थिक रूप कमजोर करने की लिए की है। वो भारत को ईरान से तेल खरीदने देगा इसके लेकर सस्पेंस बरकरार है।
यदि होर्मुज मार्ग में रुकावट जारी रहती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ेगा। दुनिया के लगभग 20% तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है, जबकि भारत के लिए यह आंकड़ा और भी अधिक है। ऐसे में किसी भी तरह की नाकाबंदी भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, अपनी जरूरत का करीब 85% तेल आयात करता है। खाड़ी देशों से आने वाला अधिकांश तेल होर्मुज के रास्ते ही पहुंचता है। पहले ईरान द्वारा की गई नाकाबंदी के दौरान भारत को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था, हालांकि पुराने संबंधों के चलते भारतीय जहाजों को कुछ राहत मिली थी।
अमेरिका की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाना माना जा रहा है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिकी नौसेना चीनी तेल टैंकरों को भी रोकेगी, क्योंकि चीन ईरान से तेल आयात करने वाला सबसे बड़ा देश है।
लंबे समय तक होर्मुज में नाकेबंदी रहने से तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे महंगाई और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा। इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव उर्वरक, रसायन और उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता पर भी दिख सकता है। फिलहाल, एक सकारात्मक पहलू यह है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से तेल आयात बढ़ा रहा है, जिससे कुछ हद तक जोखिम कम हो सकता है।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार की रुकावट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है।