विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2024 (Social Media)
सीमा कुमारी
नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: भारतीय इतिहास में 3 मई एक अहम भूमिका अदा करता है। देश-दुनिया भर में प्रेस की आजादी को सम्मान देने और उसके महत्व को रेखांकित करने के लिए 3 मई को ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ (World Press Freedom Day 2024) के रूप में मनाया जाता है। आपको जानकारी के लिए बता दें,लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया की स्वतंत्रता बेहद जरूरी है। यदि मीडिया स्वतंत्र होगी तभी वह अपना काम अच्छे से कर पाएगी। मीडियाकर्मी सत्य को सामने लाने और अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए अपनी जान भी गंवा देते हैं। हर दिन एक ऐसा उदाहरण हमारे सामने आता है जब मीडिया की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जाता है।
मीडिया कर्मी के जज्बे को सलाम
कभी मुखर होने के लिए तो कभी बड़े घोटालों को सामने लाने के लिए मीडिया कर्मियों को अक्सर अपने कर्तव्यों को करने का खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। इसी कारण हर साल 3 मई को मीडियाकर्मियों के जज्बे को सलाम करने के लिए वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे (World Press Freedom Day) मनाया जाता है ताकि सभी को प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व के विषय में बताया जा सके और विचारों की स्वतंत्रता के अधिकार को स्थापित किया जा सके। इसके साथ ही इस दिन उन सभी पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को याद किया जाता है जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जान गवां दी।
दिवस से जुड़ी खास बाते जानिए
आज ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आइए जानें इस दिन से जुड़ी दिलचस्प बातें –
1- प्राप्त जानकारी के अनुसार, पत्रकारिता से सच्चाई की उम्मीद करना आग को गर्म करने और बर्फ को ठंडा करने जैसा स्वाभाविक है। लेकिन पत्रकारों के लिए पत्रकारिता न तो स्वाभाविक है और न ही आसान। पत्रकारों की गिरफ्तारी, हत्याओं और बर्खास्तगी की खबरें आती रहती हैं, पत्रकारिता के लिए बड़े पैमाने पर लड़ने के लिए शायद ही कोई पत्रकार खड़ा होता है।
2- कभी-कभी न केवल सरकार प्रेस को असली मुद्दे, सच्चाई दिखाने से रोकती हैं, बल्कि कुछ आंतरिक, व्यावसायिक, सामाजिक या आपराधिक ताकतें भी ख़बर और सच्चाई के बीच की रेखा को धुंधला करने में शामिल होती हैं। सच की राह पर चलने वाले पत्रकारों की आंखें अंधी कर दी जाएं तो कभी पत्रकार को काम पर रखा जाता है, तो कभी गिरफ्तारी और कभी-कभी हत्या तक का अंजाम भुगतना पड़ता है।
3- अपने हिस्से का सच, दूसरों का सच और एजेंडा कैसा है
4- पत्रकारों और प्रेस की आजादी की बात तो सभी करते हैं। लेकिन, आज समाज ऐसे दौर में खड़ा है, जहां हर किसी को अपने-अपने तरीके से सच जानना पड़ता है। समाज का एक हिस्सा अपने हिस्से को सच मानता है और दूसरे हिस्से के एजेंडे को सच। ऐसे में कैसे और कौन तय करेगा कि सबका अपना-अपना सच है।
5- एक समाज जो प्रेस को स्वतंत्र रखने की आशा करता है, उसमें सत्य को जानने से पहले उसे समझने और सहन करने का धैर्य होना चाहिए। सत्य की बात में न तो संतुलन होता है और न ही शब्द की चमक, इसलिए हमें सत्य को सत्य के रूप में स्वीकार करना चाहिए, प्रेस या पत्रकारों से किसी वर्ग विशेष पर ध्यान देने की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का महत्व
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में सरकारों को याद दिलाने में यह दिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस दिन उन पत्रकारों को भी याद किया जाता है जिन्होंने पत्रकारिता में अपना अहम योगदान दिया और इस क्षेत्र के लिए जान गंवाने वालों को भी याद किया जाता है।
इस दिन पत्रकारों पर हमले और उनकी आजादी को नुकसान पहुंचाने वाले पलों को याद किया जाता है और उन पर चर्चा की जाती है। इस दिन सभी देशों की सरकारों को आगाह किया जाता है कि पत्रकारों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। पत्रकारों की स्वतंत्रता और सुरक्षा के लाभों के बारे में और देश की प्रगति में पत्रकारिता कैसे योगदान करती है, इसके बारे में भी देश को आगाह किया जाता है।