रोबोटिक पनडुब्बी। इमेज सोशल मीडिया
Indian Navy Submarine: भारत की नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए Jalkapi XLAUV यानी एक्स्ट्रा लार्ज ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल का पूरा कॉन्फिगरेशन सार्वजनिक हो चुका है। इसे Rekise Marine Private Limited और Krishna Defence and Allied Industries Ltd संयुक्त रूप से बना रहे हैं। भारत का समुद्री इलाका बहुत बड़ा है। इसकी निगरानी करना आसान नहीं है। इसी चुनौती से निपटने के लिए भारत ने Jalkapi XLAUV प्रोजेक्ट शुरू किया। यह ऐसी पनडुब्बी है, जिसे चलाने के लिए क्रू या इंसान की जरूरत नहीं है। यह पूरी तरह से कृत्रिम बुद्धिमता (AI) और सेंसर पर आधारित है। प्रोजेक्ट को iDEX ADITI 1.0 चैलेंज के तहत स्वीकृति मिली थी। अब इसकी बनावट का काम तेजी से चल रहा।
रिपोर्ट के अनुसार जून 2025 में गुजरात के केडीएआईएल प्लांट में इसकी पहली प्लेट काटने की रस्म पूरी हो हुई थी। मतलब इसका ढांचा बनना शुरू हो चुका है। यह पनडुब्बी न केवल जासूसी करेगी, बल्कि समंदर के नीचे बिछी दुश्मन की सुरंगों को ढूंढकर उन्हें तबाह भी कर सकती है। सबसे खास बात है कि यह आकार में बड़ी होने के बाद भी इतनी शांत है कि दुश्मन का रडार इसे पकड़ नहीं सकेगा।
इसे आसान भाषा में पानी के नीचे चलने वाला ड्रोन कह सकते हैं। मगर, यह साधारण ड्रोन से कहीं अधिक बड़ा और समझदार है। इसमें रहने की जगह या ऑक्सीजन सिस्टम की जरूरत नहीं है, इसलिए यह बहुत हल्की और छोटी जगहों से भी निकल सकती है। इसका बेलनाकार शरीर समंदर की लहरों के बीच इसकी आवाज को दबा देता है। bससे यह भूतिया पनडुब्बी की तरह काम करती है। इसमें लगा AI सिस्टम खुद फैसला ले सकता है कि सामने रुकावट है तो किधर मुड़ना और रास्ता कैसे बदलना है।
भारतीय नौसेना इसे कई मुश्किल कामों के लिए इस्तेमाल करेगी। यह दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों की आवाजें रिकॉर्ड कर भारतीय मुख्यालय को भेज सकता है। यह हिंद महासागर में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों का पीछा कर सकता है। समंदर की गहराई में छिपी पहाड़ियों और गुफाओं का सटीक नक्शा बनाना, ताकि हमारे दूसरे जहाज सुरक्षित रहें। युद्ध के समय दुश्मन समंदर में विस्फोटक बिछा देते हैं तो जलकपि उन्हें बिना नुकसान के ढूंढकर बेअसर कर देगा।
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जलकपि को दुनिया के सबसे आधुनिक सेंसरों से लैस किया गया है। इसमें पानी के नीचे देखने वाले इंफ्रारेड कैमरे और आवाज पकड़ने वाले सोनार लगे हुए हैं। यह मिशन खत्म होने के बाद खुद-ब-खुद अपने बेस या मदर शिप पर वापस लौट सकता है। इसे जासूसी के बजाय हमला करने के लिए भेजना है तो इसके अंदर के पुर्जे और हथियार तुरंत बदले जा सकते हैं।
भारत ने इस पर तेजी से काम किया है। इसका निर्माण गुजरात में केडीएआईएल की फैक्ट्री में हो रहा है। संभावना है कि इस साल के अंत तक इसके समुद्री ट्रायल शुरू हो जाएंगे। यह पूरी तरह मेड इन इंडिया है। इससे भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी खुद की रोबोटिक पनडुब्बी तकनीक है।