शशि थरूर ने कांग्रेस पर की ‘स्ट्राइक’… राहुल, प्रियंका का नाम लेकर परिवारवाद पर बोला हमला
Dynastic Politics: कांग्रेस नेता शशि थरूर ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का नाम लेकर देश की राजनीति में परिवारवाद की समस्या पर जोरदार हमला बोला है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
शशि थरूर, राहुल, प्रियंका
Shashi Tharoor on Indian Politics: कांग्रेस नेता और केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने देश में परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय राजनीति को “पारिवारिक व्यवसाय” बनाकर रख दिया गया है। थरूर ने इस विषय पर ‘Indian Politics Are a Family Business’ शीर्षक से एक आर्टिकल लिखा है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर गांधी-नेहरू परिवार का जिक्र किया है। साथ ही, उन्होंने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और बीएसपी सुप्रीमो मायावती का उदाहरण देते हुए कहा है कि जब सीधा वारिस नहीं मिला, तो इन नेताओं ने अपने भतीजों को ही उत्तराधिकारी बना दिया।
‘परिवारवाद भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा’
थरूर ने अपने लेख में लिखा है कि वंशवाद की राजनीति ने भारतीय लोकतंत्र को कमजोर किया है और इस सोच को मजबूत किया है कि नेतृत्व करना किसी का जन्मसिद्ध अधिकार हो सकता है।
‘पद को खानदानी विरासत समझ लिया जाता है’
उन्होंने लिखा, “यह विश्वास कि राजनीतिक परिवारों के लोग ही नेतृत्व करने के योग्य हैं, अब पंचायत से लेकर संसद तक हमारी शासन प्रणाली में गहराई से पैठ बना चुका है। लेकिन जब चुने हुए पद को खानदानी विरासत मान लिया जाता है, तो शासन की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है।”
सम्बंधित ख़बरें
मोहन भागवत से लेकर राहुल गांधी और अंबानी-अडानी तक, सुप्रिया सुले की बेटी की शादी में उमड़ा दिग्गजों का सैलाब
धर्मेन्द्र प्रधान को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए…अजय राय ने पेपर लीक मामले पर BJP को घेरा, जानें क्या कहा
कांग्रेस ने राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाया, विश्वास सारंग बोले- हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं
‘एक्सपोज हो गए राहुल…’, मोदी-ट्रंप मुलाकात पर शशि थरूर के बयान पर BJP का पलटवार; बोली- झूठा नैरेटिव ध्वस्त
राहुल और प्रियंका पर भी टिप्पणी
थरूर ने कांग्रेस की राजनीति पर भी सवाल उठाए और कहा, “दशकों तक एक ही परिवार ने भारतीय राजनीति पर प्रभुत्व बनाए रखा है। नेहरू-गांधी परिवार जिसमें जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हैं, स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़ा जरूर है, लेकिन इसी ने यह धारणा भी मजबूत की कि राजनीतिक नेतृत्व जन्म से तय होता है।”
ममता बनर्जी और मायावती भी निशाने पर
थरूर ने लिखा, “ममता बनर्जी और कुमारी मायावती जैसी महिला नेताओं ने भी, जिनके कोई सीधे वारिस नहीं हैं, अपने भतीजों को ही उत्तराधिकारी के रूप में आगे बढ़ाया है।”
यह भी पढ़ें- Bihar Opinion Poll: बिहार में हो गया खेला? नीतीश से आगे निकल गए तेजस्वी, सर्वे ने उड़ाई NDA की नींद
‘परिवारवाद की जगह योग्यता को मिले महत्व’
थरूर का कहना है कि अब समय आ गया है कि भारत की राजनीति में परिवारवाद की जगह योग्यता और काबिलियत को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया कि नेताओं के कार्यकाल की समय सीमा तय की जाए, पार्टियों के अंदर लोकतांत्रिक चुनाव सुनिश्चित किए जाएं और जनता को इतना जागरूक बनाया जाए कि वे उम्मीदवारों का चयन उनकी योग्यता के आधार पर करें।
