हार के डर से रो रहे थे रोना…SIR पर कोर्ट का आदेश आते ही विपक्ष पर टूटी BJP, बोली- ये कोई नई-नवेली योजना नहीं
Supreme Court Verdict On SIR: SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की शक्तियां बरकरार रखी हैं और इसकी संवैधानिक वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
- Written By: अमन मौर्या
सुप्रीम कोर्ट और भारत निर्वाचन आयोग (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
BJP Slams Opposition After SC Judgment: विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने मामले में दाखिल सभी याचिकों को खाजिर करते हुए चुनाव आयोग की शक्तियों को बरकरार रखा है। कोर्ट ने माना कि, मतदाता सूची में नाम जोड़ना या घटना को लेकर चुनाव आयोग मिली शक्तियां संवैधानिक रूप से सही हैं।
कोर्ट के फैसले आने के बाद भाजपा विपक्ष पर हमलावर हो गई। तेलंगाना भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र राव ने कहा कि एसआईआर चुनाव आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है जो समय-समय पर आयोजित की जाती है। उन्होंने इसे लेकर कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया।
हार के लिए SIR को ठहराया जिम्मेदार: BJP नेता
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने आईएएनएस से कहा, एसआईआर एक नियमित रूप से संचालित होने वाली चुनावी प्रक्रिया है। यह किसी सरकार या भाजपा द्वारा शुरू की गई नीति नहीं है, बल्कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा समय-समय पर आयोजित की जाने वाली एक प्रक्रिया है।
सम्बंधित ख़बरें
अभिषेक बनर्जी पर आई नई आफत, KMC ने मांगी इमारतों की एलिवेशन कॉपी, बोली- सिर्फ जवाब से काम नहीं चलेगा
पिनाराई विजयन के घर छापेमारी पर भड़की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भाजपा और कांग्रेस की बताई मिलीभगत
आसाराम को तगड़ा झटका, हाई कोर्ट ने बरकरार रखी उम्रकैद की सजा, तुरंत सरेंडर करने का आदेश
SIR पूरी तरह सही…वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा, EC को नाम जोड़ने और काटने का अधिकार
Hyderabad, Telangana: BJP State President N. Ramchander Rao says, “Twelve years of Bharatiya Janata Party rule have shown that the Prime Minister, Narendra Modi, is the longest-serving elected Prime Minister in the country. Earlier leaders like Jawaharlal Nehru were initially… pic.twitter.com/fGWnWnH6xH — IANS (@ians_india) May 27, 2026
संभवतः यह देश में 10वीं या 11वीं बार है, जब एसआईआर का संचालन किया जा रहा है। कांग्रेस और इंडी गठबंधन की पार्टियां चुनाव हार रही हैं, इसलिए वे अब अपनी हार के लिए एसआईआर प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रही हैं।
ये निरंतर चलने वाली प्रक्रिया: मुख्तार अब्बास
वहीं, वरिष्ठ भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कोर्ट के फैसले पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि देखिए एसआईआर कोई भारत में पीएम मोदी ने नई-नवेली योजना तो बनाई नहीं है। यह एक लगातार, निरंतरता के साथ चलने वाली प्रक्रिया है। इसमें जो वैध मतदाता हो, वैध नागरिक हो, उनकी सुरक्षा है।
दिल्ली: भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “देखिए एसआईआर कोई भारत में पीएम मोदी ने नई-नवेली योजना, तो बनाई नहीं है। यह एक लगातार, निरंतरता के साथ चलने वाली प्रक्रिया है। इसमें जो वैध मतदाता हो, वैध नागरिक हो, उनकी सुरक्षा है…” pic.twitter.com/5OMyR392L3 — IANS Hindi (@IANSKhabar) May 27, 2026
मताधिकार हनन का आरोप
तेलंगाना जन समिति प्रमुख एम. कोडंडाराम ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, एम. कोडंडाराम ने कहा, एसआईआर के कारण नागरिकों, विशेषकर अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और निर्धन वर्ग जैसे वंचित समुदायों के मताधिकार का हनन हो रहा है। इस कारण वे अपने सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं।
Hyderabad, Telangana: TJS chief and MLC M. Kodandaram on SIR says, “SIR is resulting in disenfranchisement of citizens, more particularly citizens belonging to the weaker sections, the SCs, minorities, and poor people in general. As a result of this disenfranchisement, they are… pic.twitter.com/RLLx3TWtoO — IANS (@ians_india) May 27, 2026
मतदान वह संवैधानिक हथियार है, जिसके बल पर ये वर्ग सरकार से अपनी मांगें मनवाते हैं। यदि उनसे यह अधिकार छिन गया, तो वे नागरिक अधिकारों से विहीन हो जाएंगे और फिर सरकार के समक्ष अपनी बात रखने की उनकी शक्ति पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
ये भी पढ़े- बकरीद को लेकर असम के मुस्लिम समुदाय ने उठाया बड़ा कदम, CM हिमंता ने जताई खुशी, कही ये बड़ी बात
क्या है पूरा मामला?
चुनाव आयोग द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में कराए गए एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के समूह ने याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मतदाता सूची का संशोधन की प्रक्रिया एनआरसी जैसी थी, चुनाव आयोग इसके जरिए लोगों की नागरिकता का सत्यापन कर रहा था।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, नागरिकता तय करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। 29 जनवरी को सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली थी। इसी पर आज कोर्ट ने फैसला सुनाया है।
