Supreme Court Verdict: SIR पर आज सुप्रीम फैसला, तय होंगी चुनाव आयोग की शक्तियां, कई राज्यों पर पड़ेगा असर

Supreme Court Verdict On SIR Voter List: वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण मामले में चुनाव आयोग के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट आज CJI सूर्यकांत की बेंच में सुनाएगा बड़ा फैसला।
Supreme Court Verdict: Landmark Ruling on SIR Today—Election Commission's Powers to be Defined; Impact Expected Across Several States.
सुप्रीम कोर्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Election Commission Special Intensive Revision Validity: बिहार में भारच निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के लिए कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा। इसकी सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच करेगी। आज होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इस पर निर्णय सुनाएगा कि चुनाव आयोग को इतने बड़े पैमाने पर एसआईआर कराने का अधिकार है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में दावा किया गया था कि संविधान के अनुच्छेद 326, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और इसके अनुसार बनाए गए नियमों के तहत इतने बड़े पैमाने पर एसआईआर कराने की शक्ति चुनाव आयोग के पास नहीं है।

जनवरी में हो चुकी है सुनवाई

29 जनवरी को सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली थी। एसआईआर के खिलाफ दायर इन याचिकाओं में एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की याचिका भी शामिल है।

कोर्ट ने नहीं लगाई रोक

बता दें कि कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई थी। बिहार के बाद यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, केरल और तमिलनाडु में पूरी हो चुकी है, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और गुजरात आदि अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया अभी जारी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इन राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि वह इस कानूनी प्रश्न का निर्णय करेगी कि क्या निर्वाचन आयोग को इस प्रकार का अभ्यास कराने का अधिकार है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप

एसआईआर के खिलाफ कोर्ट में दायर याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची का संशोधन की यह प्रक्रिया एनआरसी जैसी थी, इसके जरिए चुनाव आयोग लोगों की नागरिकता का सत्यापन कर रहा था, जबकि नागरिकता तय करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।

बता दें बिहार में पहले चरण में एसआईआर प्रक्रिया में चुनाव आयोग ने 65 लाख लोगों के नाम जारी किया था। इन लोगों का नाम SIR के तहत जारी मतदाता सूची से हटा दिया गया था।

आयोग ने रखा अपना पक्ष

वहीं, चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया का बचाव किया था। इस प्रक्रिया में आधार और मतदाता पहचान पत्र को शामिल करने के मुद्दे पर चुनाव आयोग ने कहा था कि इसे नागरिकता के निर्णायक प्रमाण के रूप में नहीं माना जा सकता है।

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