Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

बच्चा अपना हो या गोद लिया, मां तो मां है! मैटरनिटी लीव पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 3 महीने की सीमा भी हटाई

Supreme Court Maternity Leave Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि गोद लेने वाली माताएं भी जैविक माताओं के समान ही मातृत्व अवकाश की हकदार हैं।

  • Written By: अर्पित शुक्ला
Updated On: Mar 17, 2026 | 01:37 PM

सर्वोच्च न्यायालय ( सोर्स- सोशल मीडिया)

Follow Us
Close
Follow Us:

Supreme Court: मातृत्व और महिला अधिकारों की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि गोद लेने वाली माताएं (Adoptive Mothers) भी जैविक माताओं (Biological Mothers) के समान ही मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) की हकदार हैं। न्यायालय ने कहा कि मातृत्व संरक्षण एक मूलभूत मानवाधिकार है और बच्चे को जन्म देने के तरीके के आधार पर इसमें कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।

3 महीने की उम्र की सीमा खत्म

सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60(4) के उस प्रावधान को असंवैधानिक ठहराया है, जिसमें केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही मातृत्व अवकाश देने का नियम था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि 3 महीने से बड़े बच्चे को गोद लेने वाली महिला को छुट्टी देने से इनकार करना समानता (अनुच्छेद 14) और जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है।

अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

जस्टिस की पीठ ने फैसला सुनाते हुए परिवार की अवधारणा पर गहरी टिप्पणी की:

सम्बंधित ख़बरें

ऊना कांड पर 10 साल बाद ‘इंंसाफ’: 5 दोषियों को 5-5 साल की जेल, 35 की रिहाई ने फिर खड़े किए सवाल!

‘पीएम मोदी में दिखता है पिता जैसा स्नेह’: वरुण गांधी ने परिवार संग की मुलाकात, पीएम को बताया देश का ‘संरक्षक’

पिता की मौत, टॉप कमांडर के उड़े चिथड़े…अमेरिकी हमले से कैसे बचे मोजतबा? मौत को मात देकर बने सुप्रीम लीडर

बंदूक से लेंगे 400 मौतों का बदला…पाकिस्तान की नापाक हरकत पर भड़के तालिबानी नेता, ‘जंग’ का ऐलान

गैर-जैविक तरीके भी कानूनी: परिवार बनाने के गैर-जैविक तरीके (जैसे गोद लेना) उतने ही कानूनी और गरिमापूर्ण हैं जितने कि जैविक तरीके।

समान अधिकार: गोद लिया हुआ बच्चा और जैविक बच्चा कानून की नजर में समान हैं। उनके बीच अंतर करना बच्चे और माँ दोनों के अधिकारों का हनन है।

रिप्रोडक्टिव ऑटोनॉमी: प्रजनन स्वायत्तता का अधिकार केवल जैविक जन्म तक सीमित नहीं है, इसमें बच्चे को गोद लेकर पालन-पोषण करना भी शामिल है।

पितृत्व अवकाश पर विचार का आग्रह

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश नीति लाने पर विचार करने का भी आग्रह किया है। न्यायालय का मानना है कि बच्चे के पालन-पोषण में पिता की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है और आधुनिक समाज में इसे कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए।

यह भी पढे़ं- केंद्रीय मंत्री की बेटी का एपस्टीन से नाम जोड़ना पड़ेगा भारी, हाईकोर्ट ने 24 घंटे में हटाने का दिया निर्देश

इस फैसले के बाद अब दत्तक माताएं बिना किसी आयु सीमा की बाधा के अपने बच्चे के साथ समय बिताने और उसकी देखभाल करने के लिए कानूनी रूप से मातृत्व लाभ प्राप्त कर सकेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।

Supreme court verdict maternity leave for adoptive mothers paternity leave policy

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Mar 17, 2026 | 01:37 PM

Topics:  

  • Latest News
  • Supreme Court
  • Today Hindi News

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.